
Devendra Fadnavis and Eknath Shinde
महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे और बीजेपी गठबंधन सरकार ने आरे मेट्रो कार शेड के स्थानांतरण और राज्य में मामलों की जांच के वास्ते सीबीआई को आम मंजूरी सहित पिछली एमवीए सरकार के कम से कम आधे दर्जन फैसलों को बदल दिया है या उनपर रोक लगा दी है। ‘सीबीआई‘ के बारे में शिंदे सरकार का हाल का फैसला इस मायने में अहम है कि पिछली एमवीए सरकार ने इस जांच एजेंसी को आम मंजूरी यह कहते हुए वापस ले ली थी कि ‘राजनीतिक नफा-नुकसान के लिए सीबीआई का अनुचित उपयोग हो रहा है।
फिलहाल शिंदे सरकार ने इस महीने की शुरूआत में सत्ता में 100 दिन पूरे कर लिए हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के खिलाफ सीएम शिंदे के बगावत करने और पार्टी के 55 में 44 विधायकों के साथ एक अलग धड़ा बना लेने के बाद एमवीए सरकार गिर गयी थी और शिंदे सरकार सत्ता में आयी थी। एकनाथ शिंदे ने इस साल जून में सीएम पद की शपथ ली थी और बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम बने थे। यह भी पढ़े: Mumbai News: छठ पूजा को लेकर BJP और NCP आमने-सामने, BMC ने रद्द किया एनसीपी नेता का आवेदन
सत्ता में आते ही शिंदे सरकार ने बदल दिए थे कुछ अहम फैसले: नवंबर 2019 में सत्ता में आने के बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की एमवीए सरकार ने पिछली बीजेपी-शिवसेना सरकार के कुछ खास नीतिगत फैसले बदल दिए थे। बीजेपी-शिवसेना सरकार में देवेंद्र फडणवीस सीएम थे। शिंदे सरकार ने उन चार नीतिगत फैसलों को वापस लाने का निर्णय किया जो 2014-2019 के दौरान फडणवीस सरकार द्वारा लिये गये थे लेकिन बाद में एमवीए सरकार ने इन्हें खारिज कर दिया था।
ये अहम फैसले, जो बदल दिए गए: बता दें कि इन फैसलों में कृषि उपज विपणन समिति बाजारों में किसानों के मताधिकार की बहाली, आपातकाल के दौरान जेल में डाल दिए गए लोगों के लिए पेंशन दोबारा शुरू करना, लोगों के बीच से ग्राम प्रमुख और निगम परिषद अध्यक्षों का निर्वाचन शामिल हैं। महाराष्ट्र कृषि उपज एवं विपणन; विकास एवं विनियमन अधिनियम 1963 में सिर्फ ग्राम पंचायत, कृषि साख सोसाइटी एवं बहुद्देश्यीय सोसाइटियों के सदस्यों को ही समिति के सदस्यों के इलेक्शन की इजाजत थी लेकिन अगस्त 2017 में बीजेपी-शिवसेना सरकार ने उस कानून में संशोधन कर किसानों को भी मताधिकार दिया था। उसे जनवरी, 2020 में एवीए सरकार ने कैंसिल कर दिया था।
बता दें कि शिंदे सरकार ने उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं की पेंशन भी बहाल की है जिन्हें इमरजेंसी में जेल में डाल दिया गया था। साल 2017 में पहली बार फडणवीस सरकार ने यह निर्णय किया था जिसे एमवीए सरकार ने 2020 में बदल दिया था और दावा किया था कि अधिकतर लाभार्थी आरएसएस के कार्यकर्ता हैं।
Updated on:
23 Oct 2022 02:57 pm
Published on:
23 Oct 2022 02:56 pm
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