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Mumbai News: हवा की नमी से बना पानी पीएंगे यात्री, 6 रेलवे स्टेशनों पर लगाए गए मेघदूत मशीन

सेंट्रल रेलवे ने एक बड़ा फैसला किया है। 6 रेलवे स्टेशनों में वाटर कियोस्क लगाए जाएंगे। यात्रियों को हवा से पानी मिलेगा। यह स्विच ऑन करने के कुछ घंटों के भीतर पानी पैदा करता है और एक दिन में 1000 लीटर पानी पैदा करता है इसलिए इसे पीने योग्य पानी के लिए तत्काल समाधान के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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Meghdoot Machine

मध्य रेलवे ने सोमवार को मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर हवा से पानी निकालने वाली मेघदूत मशीनें लगाकर वाटर वेंडिंग मशीन वापस करने का एलान किया है। सेंट्रल रेलवे ने शुरु में 6 स्टेशनों पर 17 कियोस्क लगाए गए हैं। इनमें सीएसएमटी और दादर में पांच-पांच, ठाणे में चार और कुर्ला, घाटकोपर और विक्रोली में एक-एक मशीन शामिल हैं। यात्री इस मशीन का उपयोग कर अपनी पीने की पानी की बोतलें भर सकते है।

एक अधिकारियों ने कहा कि एक लीटर की बोतल को 12 रुपये में रिफिल किया जा सकता है, जबकि 500 मिलीलीटर की बोतल की कीमत 8 रुपए है। सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने बताया कि हमने स्टेशनों पर वायुमंडलीय जल जनरेटर उपकरण स्थापित किए हैं जो आसपास की हवा से पानी बनाते हैं, मैत्री एक्वाटेक द्वारा स्थापित उपकरण हवा में जल वाष्प को ताजे और स्वच्छ पेयजल में परिवर्तित करने के लिए नवीन तकनीक का उपयोग करता है। यह तकनीक संक्षेपण के विज्ञान का उपयोग करती है। यह भी पढ़ें: Pune News: पुणे में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 53 प्रतिशत की वृद्धि, NCRB की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

मशीन में मौजूद दूषित पदार्थो को निकालने के लिए हवा को अच्छी तरफ से फिल्टर किया जाएगा। फिल्टर की गई हवा मशीन के कूलिंग चेंबर से गुजरेगी जहां की हवा ठोस में बदल जाएगी। संघनित हवा पानी में बदल जाएगी। इससे निकलने वाला पानी स्टोरेज टैंक में जमा हो जाएगा। टैंक से छोड़ा गया पानी भी फिल्ट्रेशन की अलग-अलग परतों से होकर जाएगा। इस प्रकार की प्रक्रिया के बाद हवा से शुद्ध पानी मिलेगा।

बता दें कि ये उपकरण भारत के पहले स्वदेशी वायुमंडलीय जल जनरेटर हैं जिनमें पुनर्खनिजीकृत पानी है। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने पानी तैयार करने के लिए हैदराबाद के सीएसआईआर-भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ सहयोग किया है। वहीं, वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कंपनी मशीनों का देखभाल करेगी और रेलवे को सालाना 25 लाख 50 हजार रुपये मिलेंगे, जो कि प्रत्येक कियोस्क के लिए प्रति वर्ष 1 लाख 50 हजार रुपए है।

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