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कोरोना की लड़ाई में बिहार का मखाना भी हुआ शामिल

(Bihar News ) बिहार का मखाना (Fox nut ) विश्व के लोगों को कोरोना से लडऩे (Fight against Corona ) की ताकत देगा। इस सूखे मेवे में हर वह जरूरी विटामिन है जो किसी व्यक्ति को कोरोना से लडऩे की ताकत देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इम्युनिटी बढ़ाने में भी (Makhana increasing immune system ) यह सहायक है। इसके साथ इसमें दिल के मरीजों को राहत देने वाले भी तत्व होते हैं।

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कोरोना की लड़ाई में बिहार का मखाना भी हुआ शामिल

कोरोना की लड़ाई में बिहार का मखाना भी हुआ शामिल

मुजफ्फरपुर(बिहार): (Bihar News ) बिहार का मखाना (Fox nut ) विश्व के लोगों को कोरोना से लडऩे (Fight against Corona ) की ताकत देगा। इस सूखे मेवे में हर वह जरूरी विटामिन है जो किसी व्यक्ति को कोरोना से लडऩे की ताकत देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इम्युनिटी बढ़ाने में भी (Makhana increasing immune system ) यह सहायक है। इसके साथ इसमें दिल के मरीजों को राहत देने वाले भी तत्व होते हैं।

मखाना उत्पादकों को मिलेगा नया बाजार
केन्द्र सरकार ने मखाना की ब्रांडिग के साथ निर्यात की घोषणा की तो राज्य सरकार ने इस कृषि उत्पाद की जीआई टैंगिंग की पहल शुरू कर दी। टैग मिल गया तो विश्व में कोई कहीं माकेर्टिंग करेगा उसे बिहार के नाम से बखाना बेचना होगा। दूसरे किसी भी देश और राज्य का दावा इस कृषि उत्पाद पर नहीं होगा। इसी के साथ राज्य के मखाना उत्पादकों को नया बाजार मिल जाएगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी। खेती भी बढ़ेगी।

टैग के लिए किया आवेदन
मखाना को जीआई टैग मिला तो राज्य का यह पांचवां कृषि उत्पाद होगा, जो इस श्रेणी में आएगा। इसके पहले कतरनी चावल, जदार्लू, आम, शाही लीची और मगही पान को जीआई टैंग मिल चुका है। इसके लिए तीन साल के प्रयास के बाद कृषि सचिव डॉ. एन सरवण कुमार की पहल पर किसानों की संस्था का निबंधन हो गया। बिहार कृषि विश्वविद्यालय इसकी प्रक्रिया पूरी कर चुका है। कुलपति डॉ. एके सिंह की पहल पर आवेदन के साथ सारे जरूरी कगजात चेन्नई के इटलेक्चुुअल प्रोपर्टी कार्यालय को भेजा जा चुका है। उम्मीद है जल्द ही टैग मिल जाएगा।

10 ग्राम में 362 किलो कैलोरी
मखाने का उत्पादन 6000 टन होता है। इससे 362 किलो कैलोरी प्रति सौ ग्राम में मिलती है। इसमें 76.9 प्रतिशत कार्बोहाइडे्रड तथा 0.5 प्रतिशत मिनरल होता है। मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए भी प्रयास हो रहे हैं। बायोटेक किसान हब के माध्यम से इसकी खेती हो रही है। सबौर मखाना वन प्रभेद विश्वविद्यालय में ईजाद की गई है, जो उत्पादन के साथ गुणवत्ता बढ़ाने में भी सहायक है।

6 हजार टन उत्पादन
राज्य में मखाना का उत्पादन लगभग छह हजार टन होता है। यह विश्व में होने वाले उत्पादन का 85 प्रतिशत है। इसके अलावा शेष 15 प्रतिशत में जापान, जर्मनी, कनाडा, बांग्लादेश और चीन का हिस्सा है। विदेशों में जो भी उत्पादन होता है, उसका बड़ा भाग चीन में होता है, लेकिन वहां इसक उपयोग केवल दवा बनाने के लिए होता है।

राष्ट्रीय मखाना शोध केंद्र

बिहार के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, सीतामढ़ी, पूर्णिया, कटिहार आदि जिलों में मखाना का सार्वाधिक उत्पादन होता है। मखाना के कुल उत्पादन का 88 बिहार में होता है। दरभंगा के निकट बासुदेवपुर में राष्ट्रीय मखाना शोध केंद्र की स्थापना की गयी। दरभंगा में स्थित यह अनुसंधान केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्य करता है। दलदली क्षेत्र में उगनेवाला यह पोषक भोज्य उत्पाद के विकाश एवं अनुसंधान की प्रबल संभावनाएँ है।

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