कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ
चौसला. गोविन्दी मारवाड़ स्थित नील कंठ महादेव मंदिर सेवा समिति की ओर से मंदिर प्रांगण में सोमवार को कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। सुबह सवा 9 बजे जगदम्बा होटल के पीछे स्थित कुएं पर ध्वज व कलश पूजन के साथ यात्रा रवाना हुई। गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा जगदम्बा होटल के पास से प्रारंभ हुई। जो मुख्य मार्ग होते हुए कथा स्थल नील कंठ महादेव मंदिर पहुंची। यात्रा में शामिल महिलाएं एवं युवतियां सज-धज एवं नए परिधान पहने हुए थी। जिससे कलश यात्रा की शोभा देखते ही बन रही थी इस दौरान धार्मिक गीत एवं भजन भी गाए गए। गाजे-बाजे की मधुर धुन पर श्रीकृष्ण की वंदना से गांव का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। कलश यात्रा में शामिल महिलाएं सिर पर मंगल कलश रखकर एवं पुरुष श्रद्धालु जयघोष लगाते हुए चल रहे थे। कई जगह कलश यात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। इस मौके पर जयपुर से आए कथा वाचक पंडित चन्द्रप्रकाश शर्मा ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से पापों का नाश होता है और मनुष्य को सत्य का ज्ञान होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रभु की शरण में जाने से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। सतत् निरन्तर प्रभु का नाम अन्तकरण में चलते रहना चाहिए। इस धरती पर तीन चीजे नहीं बदलती अस्तित्व, ज्ञान और आनंद, लेकिन रूप और नाम बदलता है, भगवान भी हर युग में नाम और रूप बदलकर पापों का नाश करने और भक्तों का भला करने धरती पर आते है। चार गाडिया, बंगले होना पूर्ण भगवत कृपा नहीं है, जिसको भागवत अपना सत्संग दे वह भागवत कृपा है। सच्चे मन से कथा ग्रहण करने से आत्म शुद्धीकरण होता है। भागवत तीन प्रकार के लोगों को शुद्ध करने के लिए कार्य करती है। भागवत आयोजक, भागवत वक्ता व भागवत श्रोता तीनों का भागवत के माध्यम से आत्म शुद्धीकरण होता है। उन्होंने कहा कि भागवत को केवल सुने नहीं, अपितु मनन करें और विचार करें। विचार करने से ही भागवत का साक्षात्कार होगा। अपनी बुद्धि को भगवान की सेवा में लगाएं। यही मनुष्य जीवन का सार है। कथा के दौरान हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा हरे-हरे सहित ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: पर श्रद्धालु झुमते रहे। आयोजन समिति ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर सवा 12 बजे से शाम सवा 5 बजे तक चलेगी। भागवत कथा का समापन 1 जुलाई को पूर्णाहुति एवं भण्डारे के साथ होगा। इस मौके पर बालाजी डूंगरी के पुजारी पवन कुमार स्वामी, पूर्व सरपंच सार्दुल सिंह, शेर सिंह राठोड़, मदन सिंह शेखावत सहित ग्रामीण उपस्थित थे।