
कुचामन के चिकित्सालय में लगी पुरानी सोनोग्राफी से कार्य करते सोनोलॉजिस्ट।
बरसों पुरानी ब्लैक एण्ड वाइट मशीन से सोनोग्राफी
6 माह पहले एचडी सोनोग्राफी मशीन के लिए 13 लाख रुपए स्वीकृत, लेकिन अब तक नहीं लगी ...
डेढ सौ बेड के चिकित्सालय में महज एक सोनोलॉजिस्ट,
नि:शुल्क जांच के नाम पर मरीजों से हो रहा मजाक
2-3 दिन इंतजार के बाद आता है सोनोग्राफी का नम्बर
मजबूरी में मरीजों को बाहर करवानी पड़ती है सोनोग्राफी
अधिकांश मरीजों का सरकारी चिकित्सालय या तो नम्बर ही नहीं आता और नम्बर आने के बाद सोनोग्राफी हो भी जाए तो चिकित्सक इसकी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं करते।
राज्य सरकार ने 24 जून 2021 को प्रदेश के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में नई सोनोग्राफी मशीनों के लिए 5 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की थी। इस स्वीकृति में कुचामन के राजकीय चिकित्साल में भी 13 लाख रुपए की नई एचडी सोनोग्राफी मशीन लगनी थी, लेकिन छह माह बीतने के बाद अब भी चिकित्सालय को नई सोनोग्राफी मशीन नहीं मिली है। इसके चलते चिकित्सालय में अब भी 2008 की ब्लैक एण्ड वाइट सोनोग्राफी मशीन से जांच की जा रही है। जिसकी अब विजिबिलिटी (दृश्यता) भी कमजोर हो गई है। ऐसे में खुद सोनोग्राफर और चिकित्सक भी बीमारी नहीं पकड़ पा रहे हैं। मजबूरन मरीजों को बाहर महंगे दामों पर सोनोग्राफी करवानी पड़ रही है। कई मरीज बाहर जांच करवाने में सक्षम नहीं होने पर चिकित्सक आधी अधूरी हॉस्पिटल की जांच के भरोसे ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अधिकांश मरीजों को तो चिकित्सक खुद मजबूरी में निजी जांच केन्द्रों में सोनोग्राफी करवाने की राय देते हैं। इससे मरीजों को प्रति सोनोग्राफी 600 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि चिकित्सालय में यह जांच नि:शुल्क है।
12 सौ का आउटडोर-
चिकित्सालय में प्रतिदिन औसत करीब 1200 मरीजों का आउटडोर रहता है। इस आउटडोर में गर्भवती महिलाओं सहित हर्निया, अपेंडिक्स, पेट में सूजन, लीवर में सूजन समेत अन्य पेट की बीमारियों में सोनोग्राफी जांच करवाई जाती है। प्रतिदिन 300 से अधिक मरीजों को चिकित्सक की ओर से पेट की बीमारी एवं गर्भवती होने पर सोनोग्राफी जांच करवाने के लिए लिखा जाता है। यदि जांच लिखने के दौरान सोनोग्राफर ड्यूटी पर है तो एक-दो घंटे में जांच के लिए नम्बर आएगा। तब तक मरीज का उपचार शुरू नहीं हो सकेगा। इनमें से महज 40 मरीजों की ही सोनोग्राफी चिकित्सालय में होती है। चिकित्सालय में हुई सोनोग्राफी पर चिकित्सक पूरी तरह विश्वास नहीं करते। ऐसे में कई बार मरीजों को गलत उपचार दे दिया जाता है।
एक सोनोलॉजिस्ट के भरोसे जांच
चिकित्सालय में बारह सौ मरीजों का आउटडोर होने के बावजूद महज एक सोनोलॉजिस्ट डॉ. बलवीर ढाका नियुक्त है। चिकित्सालय समय के बाद भी कई मर्तबा ढाका को सोनोग्राफी करनी पड़ती है। इसके बावजूद बाहर लंबी कतार में इंतजार में खड़ा रहना पड़ता है। ढाका को सप्ताह में 2 से 3 पोस्टमार्टम भी करने होते हैं, जिससे सोनोग्राफी कार्य बंद ही जाता है। इसके अलावा कई महीनें में औसतन 4-5 बार इन्हें कोर्ट में पेशी पर जाना पड़ता है और मासिक 4-5 डे ऑफ (साप्ताहिक अवकाश) हो जाता है। ऐसे में सोनोग्राफी कक्ष में इनकी ड्यूटी करीब 20 दिन की ही रहती है। जिससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
डेढ सौ बेड का हॉस्पिटल और हालात ऐसे
शहर का यह राजकीय चिकित्सालय डेढ़ सौ बेड का है। नावां, मकराना, परबतसर, मौलासर क्षेत्र के बीच में यह चिकित्सालय सबसे बड़ा है। यहां क्षेत्र के मरीज उपचार की उम्मीद में पहुंचते हैं। लेकिन सोनोग्राफी जांच रिपोर्ट खतरे से खाली नहीं है। जबकि डेढ़ सौ बेड के हॉस्पिटल में सोनोलॉजिस्ट के तीन पद होने चाहिए और आधुनिक मशीन लगाना चाहिए, जिससे मरीजों की पूरी जांच हो सके। स्थिति इससे कहीं अलग है। चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन पुरानी होने के कारण करीब डेढ़ सौ से अधिक लोगों को प्रतिदिन दूसरी निजी लैब पर जाकर सोनोग्राफी करवानी पड़ती है। वहां मरीजों से जांच के 600 रुपएवसूले जाते हैं।
इनका कहना-
सोनोग्राफी मशीन पुरानी हो गई है। इसमें विजिबलिटी भी कम है। सरकार ने नई मशीन लगवाने की स्वीकृति जारी कर दी है, लेकिन नई मशीन अभी आई नहीं है।
डॉ. बलवीर ढाका
सोनोलॉजिस्ट, राजकीय चिकित्सालय, कुचामन
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सरकार ने स्वीकृति तो जारी कर दी है, लेकिन अभी तक कहीं भी सोनोग्राफी मशीनें नहीं पहुंची है। इसके लिए उच्च अधिकारियों से पत्राचार भी किया जा रहा है।
प्रभारी, चिकित्साधिकारी, कुचामन
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Published on:
04 Jan 2022 05:15 pm
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