22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छोटी खाटू से मोहन भागवत का संदेश, समाज को मर्यादा का पाठ आचरण से ही सिखाया जा सकता है, पुस्तकों से नहीं

छोटी खाटू में आयोजित मर्यादा महोत्सव में आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज में मर्यादा, आचरण और संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को मर्यादा सिखाने का माध्यम आचरण है, केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं।

2 min read
Google source verification
Maryada Festival, Maryada Festival in Nagaur, Maryada Festival in Chhoti Khatu, Maryada Festival in Rajasthan, Mohan Bhagwat, Mohan Bhagwat in Nagaur, Mohan Bhagwat in Rajasthan, Mohan Bhagwat in Chhoti Khatu

मंचासीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत व आचार्य महाश्रमण। फोटो- पत्रिका

छोटी खाटू (नागौर)। छोटी खाटू में जैन संत आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में आयोजित मर्यादा महोत्सव में गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने समाज में मर्यादा, आचरण और संतुलित जीवन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को मर्यादा सिखाने का सबसे प्रभावी माध्यम आचरण है, न कि केवल पुस्तकों का ज्ञान। संतों के सान्निध्य में रहकर ही यह संस्कार समाज तक पहुंचते हैं।

सरसंघचालक ने स्वयंसेवकों के शारीरिक अभ्यास का उदाहरण देते हुए कहा कि हम लाठी क्यों उठाते हैं, इसका उद्देश्य आक्रामकता नहीं, बल्कि अनुशासन और आत्मरक्षा की भावना है। उन्होंने कहा कि वे बार-बार संतों के पास इसलिए आते हैं ताकि दृष्टि और सोच निरंतर जागृत बनी रहे। आर्थिक जीवन पर कहा कि पैसा कमाना आवश्यक है, लेकिन पैसे के पीछे भागना उचित नहीं। कमाए हुए धन का दान और समाज के लिए वितरण भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

कीटनाशक की बजाय कीट नियंत्रक का उपयोग

गो संरक्षण पर उन्होंने कहा कि गाय बचाने की बात तभी सार्थक होगी जब समाज स्वयं गाय पालन अपनाए। खेती में रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर कीट नियंत्रक के उपयोग की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि कीटों को भी जीने का अधिकार है, नियंत्रण ऐसा हो जो हमारे लिए नुकसानदायक न बने।

खुद उदाहरण पेश करें

भागवत ने भारत की आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य, अहिंसा और शाश्वत सत्य की खोज भारत में निरंतर जारी रही। सूर्य और तारों के उदाहरण से आचरण की महत्ता समझाते हुए कहा कि जिसका प्रकाश लेना है, उसके पास स्वयं प्रकाश होना चाहिए। उन्होंने समाज में आत्मीयता और उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भारतीय जीवन मूल्यों को दुनिया तक पहुंचाने का आह्वान किया। संयम, अनुशासन और संतुलन को मर्यादा की अनिवार्य शर्त बताया। उन्होंने कहा कि मर्यादा में चलने से समाज में अपराध कम होंगे और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।

यह वीडियो भी देखें

मर्यादा से ही बचेगा समाज और सृष्टि : आचार्य महाश्रमण

आचार्य महाश्रमण ने प्रवचन में मर्यादा, ज्ञान, अनुशासन और अहिंसा को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि वास्तविक रत्न पाषाण के टुकड़े नहीं, बल्कि जल, अन्न और अच्छी वाणी हैं। शास्त्रों में वर्णित आध्यात्मिक रत्न ही मानव जीवन को सही दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को सम्यक ज्ञान देने वाला गुरु मिल जाए तो उसका जीवन सफल और सही दिशा में आगे बढ़ सकता है।

ज्ञान के प्रकारों की व्याख्या करते हुए कहा कि एक ज्ञान इंद्रियों से मिलता है, दूसरा इंद्रियों की सहायता से मिलने वाला परोक्ष ज्ञान होता है। अपने भीतर का ज्ञान ही परम ज्ञान है, जिसे केवल्य ज्ञान कहा गया है। केवल्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद जानने को कुछ शेष नहीं रहता। उन्होंने कहा कि अनुशासन लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजतंत्र दोनों में आवश्यक है। कर्तव्य और अनुशासन के बिना लोकतंत्र बिगड़ सकता है। मूल नीति अहिंसा ही रहनी चाहिए, लेकिन जब सारे प्रयास विफल हो जाएं और देश की रक्षा के लिए सेना को शस्त्र उठाने पड़ें तो इसे मजबूरी में किया गया कार्य माना जाना चाहिए।

राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी : https://bit.ly/4bg81fl