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आचार संहिता ने अटकाया 87 करोड़ रुपए का अनुदान

किसानों को आठ माह से नहीं मिला मुआवजा बेमौसम बारिश से जमींदोज हुई थी तीन अरब की फसलें 97 गांवों में 148728 मैट्रिक टन फसल उत्पादन हुआ था नष्ट चार बार सूचियां बनने के बाद मिला था बजट

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आचार संहिता ने अटकाया 87 करोड़ रुपए का अनुदान

खराब हुई फसल

नागौर जिले के खींवसर उपखण्ड में बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से क्षेत्र के 97 गांवों में जमींदोज हुई फसलों का विधानसभा चुनावों को लेकर लगी आचार संहिता ने 87 करोड़ 81 लाख रुपए का आदान-अनुदान अटका दिया है। पहले भी सरकार ने कई बार पात्र किसानों की सूचियों में कमियां बताकर मुआवजा राशि पर आठ माह से कुण्डली मार रखी थी। जब सरकार ने बजट दिया तो अब चुनाव की आचार संहिता ने भुगतान पर ब्रेक लगा दिए। मार्च में हुए फसल खराबे को लेकर सरकार ने राहत के नाम पर प्रभावित किसानों की सूचियां बनाकर सरकार को भेजी, लेकिन सरकार हर बार कमियां निकालती रही। आखिरकार बजट तो दिया लेकिन आचार संहिता लगने से ठीक पहले ऐसे में जिले की कई तहसीलों में तो अनुदान वितरण हो गया, लेकिन खींवसर में अभी तक किसानों को सरकार की राहत का इंतजार है।
गत मार्च माह में बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से किसानों के खेतों में पकी पकाई करीब 2 अरब 97 करोड़ 36 लाख रुपए की फसलें जमींदोज हो गई थी। बारिश ने 7 अरब 21 करोड़ 77 लाख पशुधन पर भी कहर बरपाया, वहीं 33 प्रतिशत से अधिक फसल खराबे के चलते करीब 50 हजार किसानों की पकी पकाई फसलें पानी में तैर गई। सरकार ने एक बारगी तो तत्परता दिखाते हुए राजस्व कर्मियों ने गिरदावरी रिपोर्ट मंगवाकर भिजवाई , लेकिन सरकार ने चार माह इंतजार करने के बाद एक आदेश जारी कर बीमित फसलों के काश्तकारों के नाम सूचियों से हटाकर नई सूचियां बनाने के निर्देश दिए। पटवारियों को चौथी बार सूचियां बनाकर राज्य सरकार को भेजनी पड़ी। मार्च माह में कई बार हुई बरसात के कारण पहले भी पटवारियों ने तीन बार खराबे की सूचियां बनाई थी फिर भी सरकार ने अनुदान जारी नहीं किया। बीमित काश्तकारों के नाम हटाकर सरकार ने सूचियां भेजी उस पर सरकार ने बजट तो जारी कर दिया, लेकिन ठीक आचार संहिता लगने के एन वक्त पर इससे प्रशासन ने आदर्श आचार संहिता का हवाला देते हुए अनुदान भुगतान से हाथ खींच लिए।

इन फसलों में हुआ था नुकसान
बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से सरसों, ईसबगोल, जीरा, गेंहू, सौंफ की फसलों में भारी नुकसान हुआ था। बरसात के कारण ईसबगोल की फसलें झड़ गई व जीरे की फसल में दाने काले पड़ गए तो अन्य फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई थी। कई गांवों में तो ईसबगोल व जीरे के फसल की किसान कटाई नहीं कर पाए।
फैक्ट फाइल
ग्राम - 98
बोया गया रकबा - 61072
लघु/सीमांत किसान - 32018
बड़े काश्तकार - 17705
प्रभावित काश्तकार - 49724
प्रभावित जनसंख्या - 1 लाख 87 हजार
33 प्रतिशत से अधिक फसल खराबे के गांव- 97
खराब हुई फसलों की कीमत - 2 अरब 97 करोड़ 36 लाख
प्रभावित पशुधन - 7 अरब 21 करोड़ 77 लाख
आचार संहिता के बाद होगा भुगतान

फसल खराबे को लेकर किसानों की अनुदान राशि का सरकार ने बजट भेज दिया है, लेकिन आचार संहिता के कारण भुगतान नहीं किया गया है। आचार संहिता हटते पर सभी किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
-कैलाश जाखड़, लेखाधिकारी, सहायता विभाग।

शीघ्र मिले किसानों को राहत
किसानों को राहत देने की बजाए सरकार गांवों में महंगाई राहत कैम्प के नाम नौटंकी करती रही और जब बजट दिया तो ठीक आचार संहिता के समय। ऐसे में किसानों को अपनी नष्ट फसलों का मुआवजा समय पर नहीं मिल पाया। प्रशासन को त्वरित कार्यवाही करते हुए पीडि़त किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए।