मेड़ता शहर से 15 किमी दूर आकेली-ए गांव की बेटी डॉ. प्रियंका गोलिया अब विश्व की सर्वोच्च रैंकिंग वाली संस्थान में प्रोफेसर कहलाएगी।
मेड़ता सिटी। मेड़ता शहर से 15 किमी दूर आकेली-ए गांव की बेटी डॉ. प्रियंका गोलिया अब विश्व की सर्वोच्च रैंकिंग वाली संस्थान में प्रोफेसर कहलाएगी। कड़ी मेहनत एवं प्रतिभा के बूते डॉ. गोलिया का हेल्महोल्टज सेंटर फॉर इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी संस्थान में प्रोफेसर के रूप में चयन हुआ है। जो वहां बच्चों को सूचना की सुरक्षा यानी इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी के बारे में पढ़ाएगी। इस संस्थान में प्रोफेसर बनकर प्रियंका न सिर्फ अपने परिवार व गांव का बल्कि पूरे मेड़ता के साथ प्रदेश का भी मान बढ़ाया है।
सरकारी वैकेंसियों की तैयारी करने की भागदौड़ में व्यस्त युवाओं के बीच आईटी सेक्टर सफल कॅरियर की एक किरण लेकर आया है। जिसमें रुचि दिखा रहे युवा आज एक सरकारी सेवा में कार्यरत कार्मिक से भी कई गुणा ज्यादा सफल हो रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण ही आकेली-ए गांव निवासी डॉ. प्रियंका पुत्री परसाराम गोलिया। सालों की कड़ी मेहनत के बाद प्रियंका को जर्मनी की हेल्महोल्टज सेंटर फॉर इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में प्रोफेसर के रूप में कार्य करने का मौका मिला है। दरअसल, यह संस्था विश्व स्तर पर शीर्ष रैंकिंग वाली संस्थाओं में से एक है। जहां पूरी दुनियाभर के विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते हैं। डॉ. प्रियंका इस संस्थान में बच्चों को इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी विषय पर ही पढ़ाएगी, जिसमें उसने शोध किया था।
दरअसल, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी का मतलब है सूचना की सुरक्षा। यह एक प्रकार की नियंत्रण प्रक्रिया होती है जो सुनिश्चित करती है कि किसी संगठन या व्यक्ति के पास संग्रहित सूचना सुरक्षित रहे। इसमें उपलब्ध सभी सुरक्षा तंत्रों का उपयोग किया जाता है। जो संग्रहित और संचालित सूचनाओं को अवरोधित करते हैं और उन्हें हानि से बचाते हैं।
कैसे प्रियंका ने तय किया प्रोफेसर बनने तक का सफर
डॉ. प्रियंका ने पहले वेल्लोर से बी.टेक और फिर जयपुर से एमटेक किया। कानपुर आईआईटी से डॉक्टरेट की। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी से प्रियंका ने फिर डॉक्टरेट की, जिसका विषय था सूचना की सुरक्षा। जो वर्तमान का सबसे उभरता विषय है। सिंगापुर में शोध करते हुए डॉ. गोलिया को विश्व के चुनिंदा युवा शोधकर्ताओं के रूप में चुना गया और उसे यूटी ऑस्टिन में प्रतिष्ठित एमटी ईईसीएस राइजिंग स्टार पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद प्रियंका की प्रतिभा के कारण उसे जर्मनी के उस संस्थान ने प्रोफेसर के रूप में आमंत्रित किया गया, जिसकी आज विश्व में अपने क्षेत्र में सबसे ऊंची रैंक है।