-पहले से ही स्टाफ कम और उस पर चुनाव का अतिरिक्त काम, थाने पड़े हैं खाली-जांच के साथ आरोपियों को पकडऩे का काम भी टाला
नागौर. पहले ही नफरी की किल्लत से जूझ रहे थाने और उस पर विधानसभा चुनाव का अतिरिक्त काम। पुलिस इन दिनों अपराधियों को पकडऩे के अपने मूल काम से दूर है। किसी भी आपराधिक वारदात का अनुसंधान चुनाव की भेंट चढ़ चुका है।
सूत्रों का कहना है कि नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले के सभी थानों का तीस से चालीस फीसदी स्टाफ इन दिनों चुनाव का कामकाज संभाल रहा है। कोई एफएसटी (फ्लाइंग स्क्वॉयड टीम) में तो कोई एएसटी (स्टेटिक्स सर्विलांस टीम) में लगा है। चुनाव की इस रेलमपेल में कोई नाकाबंदी में तो कोई गश्त (मोबाइल) में लगा हुआ है। किसी थाने से 18 तो किसी थाने से पंद्रह पुलिसकर्मियों को इस काम में लगा रखा है। आरोपी की तलाश का काम लगभग बंद पड़ा है। यही नहीं किसी वारदात की जांच के लिए बाहर जाना तो दूर पीडि़त के बयान तक को टाला जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि चुनाव 25 नवंबर को है। आचार संहिता नौ अक्टूबर से लग चुकी है। करीब चालीस फीसदी थाना स्टाफ चुनाव से जुड़े नाकाबंदी/खाना तलाशी जैसे काम में लगा दिया गया है। अदालती कामकाज/आरोपी की पेशी सहित अन्य काम में कुछ पुलिसकर्मी लग जाते हैं तो कुछ छुटपुट घटना पर मौका-मुआयना करने के लिए पहुंचते हैं। आलम यह है कि कई थानों में दिन में दो-चार पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं।
पहले ही इतने कम
एसआई ही नहीं एएसआई और हैड कांस्टेबल पहले से ही कम चल रहे हैं। सत्तर फीसदी से अधिक पद एएसआई के खाली हैं। थानों में दर्ज अधिकांश मामलों की जांच हैड कांस्टेबल कर रहे हैं और उनमें भी काफी चुनावी काम में मशगूल हैं। एएसआई की छोड़ो एसआई-हैड कांस्टेबल ही नहीं कांस्टेबल तक के पद खाली पड़े हैं। बीएसएफ की चार कम्पनी आ पाई हैं, अभी 45 कम्पनी और आनी है।
अब ऐसे हो रहा है काम
सूत्रों की मानें तो थाना कोई भी हो इन दिनों अति महत्वपूर्ण केस पर ही ध्यान दिया जा रहा है। चोरी/नकबजनी समेत अन्य मामलों पर पुलिस गौर नहीं फरमा पा रही। जांच/साक्ष्य के लिए पुलिसकर्मी को बाहर भेजने से बचा जा रहा है तो हाईकोर्ट समेत अन्य बाहरी कामों को भी कुछ दिनों के लिए टाला जा रहा है। एनडीपीएस/शांति भंग समेत कुछ मामलों में जरूर कार्रवाई करने में पुलिस आगे है।