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VIDEO…सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को अंगूठा दिखा तालाब के कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण

Nagaur. गंदगी के साथ ही प्रतापसागर तालाब के जलबंध एरिया में दर्जनों की संख्या में अवैध पक्के निर्माणों से इसका पूरा स्वरूप बिगड़ा

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Nagaur news

Illegal construction in the catchment area of ​​the pond disregarding the Supreme Court guidelines

-तालाब की पाल तक अनाधिकृत निर्माणों की भेंट चढ़ी, इसके चलते बरसात का पानी तालाब तक नहीं पहुंच पाता, अपनी कमी छिपाने के लिए जिम्मेदार इसमें डाल रहे सीवरेज का पानी, ताकि तालाब भरा नजर आए

-स्पष्ट रूप से राज्य सरकार को दी गई थी नसीहत कि तालाब के जलबंध एरिया में अतिक्रमण को नहीं ठहराया जा सकता वैध, फिर भी सो रहा जिला प्रशासन
नागौर. शहर के प्रतापसागर तालाब के कैचमेंट एरिया में गंदगी की आड़ में पिछले कुछ वर्षों में अनाधिकृत तरीके से पक्के निर्माण कर लिए गए। स्थिति यह है इस तालाब के जलबंध एरिया में चारों ओर अवैध रूप से पक्के निर्माण किए जाने से स्थिति विकट होने लगी है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तालाब के पाल तक को नहीं छोड़ा गया है। यह स्थिति तब है जब कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्पष्ट से दिशा-निर्देश है कि तालाब के कैचमेंट यानि की इसके जलबंध एरिया में किसी भी सूरत में निर्माणों के अतिक्रमण को वैध नहीं ठहराया जा सकता है। इसके बाद भी शहर के प्रतापसागर तालाब के कैचमेंट एरिया में पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों की संख्या में अवैध पक्के निर्माण की वजह से इसका पूरा स्वरूप ही बिगड़ गया है। इसके बाद भी कार्रवाई के नाम पर प्रशासनिक अधिकारी अंजान बने हुए हैं।
प्रतापसागर तालाब के कैचमेंट एरिया केा अवैध पक्के निर्माणों ने निगल लिया। अब बमुश्किल तालाब का कुछ हिस्सा ही बचा है। इस पर भी गंदगी की आड़ में अवैध अतिक्रमणकर्ताओं ने पक्के निर्माण कर निगलना शुरू कर दिया है। तालाब के जलबंध एरिया में हुए अतिक्रमण के कारण बरसात के दौरान इसमें न तो पानी पर्याप्त मात्रा में पहुंच पाता है, और न ही पूरा तालाब भर पाता है। वर्तमान में तालाब के नाम पर भरा यह पानी सीवरेज का गंदा पानी है। बताते हैं कि नया दरवाजा, सोनीबाड़ी एवं शारदापुरम रोड की ओर से आने पर तालाब के इर्द-गिर्द हुए अतिक्रमण साफ तौर पर नजर आते हैं। इन निर्माणों के कारण तालाब के मूल अस्तित्व पर ही संकट उत्पन्न हो गया है।
पहले दूर से नजर आता था प्रतापसागर तालाब
स्थानीय बाशिंदे बताते हैं कि पहले यह काफी बड़ा तालाब हुआ करता था। दूर से इसका लहराता पानी नजर आता था। आसपास के लोगों की प्यास इसी तालाब से बुझती थी। बाद में पेयजल लाइन आने के बाद तालाब को बिसराने के साथ ही इसके चारों ओर अतिक्रमण होने लगे। अब वर्तमान में इन अतिक्रमणों की अब सैंकड़ों में पहुंच चुकी है। इसके चलते तालाब का आकार भी पहले की अपेक्षा बेहद कम हो गया। हालांकि शुरू में कुछ लोगों की ओर से इस प्रकार किए जा रहे अतिक्रमणों पर विरोध जताया गया, लेकिन इसे अनसुना कर दिया गया। बाद में कुछ लोगों ने इस प्रकार हो रहे अतिक्रमणों से प्रशासन को भी अवगत कराया। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिए जाने के कारण स्थिति अब स्थिति यह हो गई है कि इसके चारों ओर गंदगियों के साथ ही पूरी तरह से अतिक्रमण के जाल में फंसा यह तालाब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करने में लगा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह दिया था निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि जोहड़-पोखर अपरिवर्तनीय हैं। इनकी भूमि का उपयोग अन्य काम में हो ही नहीं हो सकता। इसके साथ ही एक मामले में सुनवाई करते हुए 25 जुलाई 2001 को पारित हुए आदेश में कोर्ट ने साफ तौर पर जंगल, तालाब, पोखर, पठार तथा पहाड आदि को समाज के लिए बहुमूल्य मानते हुए इनके अनुरक्षण को पर्यावरणीय संतुलन के लिए जरूरी माना है। निर्देश है कि तालाबों को ध्यान देकर तालाब के रूप में ही बनाए रखना चाहिए। उनका विकास एवम् सुन्दरीकरण किया जाना चाहिए। जिससे जनता उसका उपयोग कर सके। इसे पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए आदेश दिया गया कि कि तालाबों के समतलीकरण के परिणामस्वरूप किए गए आवासीय पट्टों को निरस्त किए जाए।
इनकी भूमि का उपयोग किसी जलाशय अतिक्रमण के शिकार हो नई रहे हैं। इसे नजरअंदाज किया जा जगदी है। इसे दलगत भावना अथवा संरच पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर दुरुस्त किया जरु जेना चाहिए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के ने क आदेश का पालन हमारा संवैधानिक भारत
क्या कहते हैँ जिम्मेदार...
प्रतापसागर तालाब के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण की जांच कराई जाएगी। तालाब एरिया में अतिक्रमण पाए जाने पर कार्रवाई भी होगी, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
सुनील कुमार, उपखण्ड अधिकारी नागौर
नागौर. प्रतापसागर तालाब का जलबंध एरिया अब कहीं नजर नहीं आ रहा

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