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बंट गया खाकी का कुनबा, पुलिस का रोजमर्रा का काम और प्रभावित

-पहले से ही स्टाफ की कमी, अब नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले के बीच बंटा तो किल्लत ज्यादा महसूस होने लगी, अब नफरी बढ़ाने की कवायद तेज, कुछ दिनों में बढ़ जाएगा कुनबा

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 खाकी के कुनबे का बंटवारा

खाकी के कुनबे का बंटवारा नई-नई मुश्किल पैदा कर रहा है। नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में पुलिस थाने बंटे तो लाइन का स्टाफ भी इधर-उधर कर दिया गया।

नागौर. खाकी के कुनबे का बंटवारा नई-नई मुश्किल पैदा कर रहा है। नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में पुलिस थाने बंटे तो लाइन का स्टाफ भी इधर-उधर कर दिया गया। ऐसे में पहले से ही कम नफरी के बाद और घटने से पुलिस का काम मुश्किल हो गया है। आगामी विधानसभा चुनाव के पहले कुनबे में बढ़ोत्तरी के प्रयास तेज हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार इस बंटवारे में डीडवाना-कुचामन जिले में कुचामन-डीडवाना और परबतसर एएसपी हैं जबकि नागौर में मुख्यालय स्तर पर एक ही एएसपी हिस्से आया है। हालांकि महिला अपराध, साइबर, ट्रेफिक सहित अन्य शाखा के सीओ नागौर जिले में वहां की अपेक्षा अधिक हैं। अभी पूरी तरह पुलिस के ढांचे में परिवर्तन और होना है, जिसका इंतजार चल रहा है। इस बदलाव में नागौर लाइन से करीब पचास पुलिसकर्मी भी कुचामन-डीडवाना जिले में शिफ्ट किए गए हैं।

असल में नागौर जिला अब दो भागों में बंट गया है, लेकिन पुलिसकर्मियों के हिसाब से यहां की स्थिति ठीक नहीं है। सर्किल व थाने भले ही बंट गए। इस हिसाब से पुलिस भी दो हिस्सो में बंट गई पर असल संख्या जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। नागौर (डीडवाना-कुचामन) को मिलाकर भी यहां पुलिसकर्मी ढाई हजार तक भी नहीं हैं। अब अलग-अलग होने पर भी पंद्रह-पंद्रह सौ भी बमुश्किल नहीं आ पाएंगे। ऐसे में कानून-व्यवस्था की स्थिति से कैसे निपटा जाएगा?

हालत यह है...

नागौर (डीडवाना-कुचामन) को भी शामिल कर दें तो आबादी करीब 39 लाख के आसपास है। पौने तीन सौ एएसआई के स्वीकृत पद में सिर्फ चालीस पर ही ये कार्यरत हैं, शेष खाली पड़े हैं। यही हाल एसआई का है, इसके भी आधे से अधिक पद खाली हैं। हैड कांस्टेबल-कांस्टेबल कम हैं सो अलग।

पंद्रह सौ की आबादी पर एक...

एक अनुमान के मुताबिक आबादी के हिसाब से पुलिसकर्मी की संख्या का अनुपात निकालें तो पंद्रह सौ की आबादी पर एक पुलिसकर्मी तक तैनात नहीं है। दूरदराज के इलाके और थाने कम तो पहले ही परेशानी का सबब बन चुके हैं। इस पर स्टाफ की कमी के चलते अनुसंधान की गति धीमी, ऐसे में न्याय आखिर समय पर कैसे मिले।

कुछ दिन में बढ़ सकता है कुनबा

पहले कानून-व्यवस्था की स्थिति फिर अलग-अलग काम में लगे रहने से असल में पुलिसकर्मी अपना मूल काम कर ही नहीं पा रहे। स्टाफ की किल्लत से पहले ही परेशान खाकी अब अपने कुनबे बढऩे की उम्मीद लगाए बैठी है। बताया जाता है कि आगामी चुनाव को देखते हुए पुलिस की किल्लत दूर होने वाली है। कुछ दिनों में मुख्यालय नफरी बढ़ा रहा है।

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