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मोबाइल बिगाड़ रहा बच्चों की दृ​ष्टि : प्रदेश में सरकारी स्कूलों के 47 हजार बच्चों की आंखें कमजोर

शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम में सामने आई स्थिति, अब विशेषज्ञ से नेत्र परीक्षण में अधिकारी बरत रहे उदासीनता, पिछले साल राज्यभर में करीब 75 लाख विद्यार्थियों का 70 स्वास्थ्य मापदंडों पर हुआ था परीक्षण

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नागौर. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों की आंखों के विजन को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की आंखों को कमजोर कर रहा है। ज़्यादा मोबाइल इस्तेमाल से ड्राई आई सिंड्रोम (आंखों का सूखापन), डिजिटल आई स्ट्रेन (आंखों पर तनाव), सिर दर्द और धुंधलापन जैसी समस्याएं हो रही है। प्रदेश में पिछले साल शिक्षा विभाग की ओर से करवाए गए शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत डिजिटल जांच में इसका खुलासा हुआ है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले 75 लाख बच्चों की जांच में 47 हजार की आंखें कमजोर पाई गईं। इन बच्चों को चश्मे वितरित करने के लिए दो महीने पहले स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने सभी जिलों के कलक्टर्स का पत्र लिखकर विशेषज्ञों से नेत्र परीक्षण कराने को कहा, लेकिन दो महीने बीतने के बावजूद अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया है।

विशेषज्ञों से परीक्षण कराने के बाद देंगे चश्मे

स्कूली बच्चों के समग्र स्वास्थ्य की जांच एवं निगरानी के लिए पिछले साल शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की स्थिति का 70 अलग-अलग सर्वेक्षण मापदंडों के माध्यम से आंकलन किया है। इस सर्वेक्षण में पता चला कि 47 हजार 423 बच्चों की आंखें कमजोर हैं, जिनकी विशेषज्ञों से जांच करवाने के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं से सहयोग से नि:शुल्क चश्मे वितरित करने की योजना है। इसके लिए चिकित्सा विभाग ने पिछले दिनों शिक्षा विभाग को प्रति विद्यालय के हिसाब से ब्लाइंडनेस चार्ट उपलब्ध करवाए हैं, ताकि ऐसे बच्चों की छंटनी करके विशेषज्ञों से नेत्र परीक्षण करवाया जा सके।

जयपुर में सबसे ज्यादा बच्चों की आंखें खराब

शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में सबसे ज्यादा 4226 बच्चे जयपुर जिले के हैं, जिनकी आंखें कमजोर पाई गई हैं, जबकि सबसे कम 335 सलूम्बर में मिले हैं। इसी प्रकार अजमेर में 1622, अलवर में 1029, बालोतरा में 717, बांसवाड़ा में 934, बारां में 804, बाड़मेर में 1506, ब्यावर में 1038, भरतपुर में 666, भीलवाड़ा में 1006, बीकानेर में 2049, बूंदी में 1024, चित्तौडगढ़ में 1292, चूरू में 1237, दौसा में 1277, डीग में 415, धौलपुर में 744, डीडवाना-कुचामन में 1325, डूंगरपुर में 872, गंगानगर में 2315, हनुमानगढ़ में 1684, जैसलमेर में 862, जालोर में 2205, झालावाड़ में 618, झुंझुनूं में 1032, जोधपुर में 1283, करौली में 729, खैरथल में 473, कोटा में 1046, कोटपूतली में 523, नागौर में 1327, पाली में 1379, फलौदी में 597, प्रतापगढ़ में 711, राजसमंद में 1478, सवाई माधोपुर में 515, सीकर में 1093, सिरोही में 904, टोंक में 958 तथा उदयपुर में 1573 बच्चों की आंखें कमजोर पाई गई।

चार्ट वितरित कर दिए, रिपोर्ट मांगी है

चिकित्सा विभाग से मिले ब्लाइंडनेस चार्ट हमने सीबीईओ के माध्यम से स्कूलों में वितरित करवा दिए हैं। बच्चों की रिपोर्ट अभी शाला दर्पण पर अपडेट नहीं हुई है। दो दिन पहले ही डीईओ ने दुबारा सीबीईओ को पत्र लिखा है।

- सुरेश कुमार सोनी, एडीईओ, माध्यमिक शिक्षा, नागौर


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