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बांद्रा जाने के लिए ट्रेन पर बैठे बासनी के रफीक को मुम्बई पुलिस ने उठाया

बासनी गांव के एक युवक को मुम्बई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फिल्म अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में हिरासत में लिया है।

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मारवाड़ जंक्शन से लिया हिरासत में,

दोनों आरोपी नागौर का बनकर पहुंचे थे रफीक के पास

नागौर. बासनी गांव के एक युवक को मुम्बई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फिल्म अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में हिरासत में लिया है। युवक पर फायरिंग करने वालों से सम्पर्क में होने के आरोप बताए गए हैं। हालांकि मुम्बई पुलिस उसे पकडऩे नागौर तक आ गई पर स्थानीय पुलिस अथवा प्रशासन को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी। खास बात यह कि आरोपी युवक रूटीन में ही अपने घर बासनी आया और करीब पंद्रह दिन बाद वापस बांद्रा जा रहा था। गिरफ्तार युवक का पिछला कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं निकला है।
सूत्रों के अनुसार बासनी निवासी रफीक चौधरी (38) पिछले बीस-बाइस साल से अपने भाइयों के साथ बांद्रा में दूध डेयरी का काम संभालता है। गत सोलह अप्रेल को वह बासनी आया और करीब बीस दिन बाद सोमवार को बांद्रा जाने के लिए नागौर स्टेशन से ट्रेन में बैठा था। दूसरे दिन दोपहर बारह बजे जब यहां से परिजनों ने बांद्रा में रहने वालों को फोन कर रफीक के बारे में पूछा तो उन्होंने मना कर दिया। कुछ घंटों बाद खुलासा हुआ कि उसे मुम्बई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पकड़ लिया है। रफीक को वहां की अदालत में पेश कर रिमाण्ड पर लिया गया है। सूत्र बताते हैं कि रफीक अपने भाई यूनुस, सलमान और करीम के साथ वहां डेयरी चलाता है। इनका पांचवां भाई अख्तर बासनी में ही है जो बीमार पिता व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहता है। ये भाई अपने परिवार से मिलने साल में कुछ-कुछ दिनों के लिए आते रहते हैं। इनकी पत्नी बच्चे भी बासनी ही रहते हैं। बताया जाता है कि मुम्बई पुलिस को भी सीसीटीवी फुटेज में फायरिंग करने अथवा आरोपियों के साथ घूमते हुए रफीक नजर नहीं आया है, केवल पूछताछ के लिए ही संभवतया उसे हिरासत में लिया गया है।
रफीक के छोटे भाई सलमान चौधरी का कहना है कि हवाई फायरिंग में पकड़े गए दोनों युवक नागौर से मुम्बई आने की बात कहकर रफीक से मिले थे। कुछ देर चाय-नाश्ते के बाद वो चले गए। असल में बरसों से चल रहे इस कारोबार में नागौर की बासनी के काफी लोग हैं, नागौर से आने वाले उसने मिलते हैं। किसी को घूमने-फिरने में मदद चाहिए होती है, वो भी करते हैं। रफीक ने तो अपना मोबाइल नंबर तक नहीं बदला ना ही बंद किया। वो नवीं तक पढ़ा हुआ है, उसे मोबाइल पर फोन-पे तक चलाना नहीं आता। पुलिस किस आधार पर उसे उठा ले गई, समझ नहीं आता।
नहीं दी सूचना
एसपी नारायण टोगस ने बताया कि मुम्बई पुलिस की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। यहां रफीक समेत उसके परिवार का रेकॉर्ड खंगाला गया, लेकिन कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं मिला। रफीक की भूमिका इस मामले में क्या थी, यह तो वहां की पुलिस ही बता पाएगी।

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