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नागौर

जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला ने नागौर सांसद बेनीवाल पर बोला हमला, बेनीवाल ने किया यह पलटवार …

जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला शनिवार को नागौर के खरनाल आए। उन्होंने यहां नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल पर जमकर हमला बोला। चौटाला ने कहा कि ‘हनुमान बेनीवाल को राजनीति में लाने वाला मैं ही हूं।

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नागौर. जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला शनिवार को नागौर के खरनाल आए। उन्होंने यहां नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल पर जमकर हमला बोला। चौटाला ने कहा कि ‘हनुमान बेनीवाल को राजनीति में लाने वाला मैं ही हूं। जब वो राजनीति की ए बी सी डी नहीं जानते थे, तब मैं हरियाणा से चलकर यहां दो बार विधायक बन गया।’
चौटाला खरनाल में बन रहे लोक देवता वीर तेजाजी के मंदिर का अवलोकन करने के लिए यहां आए थे। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सांसद बेनीवाल पर नुक्ताचीनी करने का आरोप लगाया। नागौर में चुनाव लडऩे के सवाल पर उन्होंने कहा कि खींवसर और नागौर का क्षेत्र उनके लिए नया नहीं। पहले भी वे दो बार राजस्थान से विधायक रह चुके और उनके दादा सांसद रह चुके। जहां तक हनुमान बेनीवाल की बात है तो ‘उन्हें राजनीति में मैं ही लेकर आया और सबसे पहले मूण्डवा से चुनाव भी लड़वाया था। बाद में युवा का अध्यक्ष भी बनाया।’

कोई योगदान नहीं, फिर भी नुक्ताचीनी करते हैं
मंदिर निर्माण को लेकर चौटाला ने कहा कि उन्होंने पहले भी कहा था और अब कह रहा हूं कि जब तक भव्य मंदिर बनकर तैयार नहीं होगा, तब तक काम बंद नहीं होने देंगे। सबके सहयोग से पश्चिमी राजस्थान का ऐसा मंदिर बनाएंगे कि दूर-दूर से लोग देखने आएंगे।

भूल रहे हैं कि चौटाला परिवार की एंट्री राजस्थान में 1990 के बाद हुई
इधर, सांसद बेनीवाल ने पलटवार में कहा कि देश के सबसे भ्रष्ट राजनेताओं में शुमार, भ्रष्टाचार के मामले में कुछ परिजनों के साथ 10 वर्षों तक जेल में रहने वाले जेजेपी के नेता अपने अंदर झांकें। बेनीवाल ने कहा कि कुछ मामलों में जेल जाने से बचने के लिए जेजेपी नेता ने हरियाणा में उस खट्टर को समर्थन दे दिया, जिसने जाट आरक्षण आंदोलन में 50 से ज्यादा जाट समाज के युवाओं पर गोलियां चलाई और हत्या की। तेजाजी के मंदिर में जो पैसे दे रहे हैं, वो निज स्वार्थ और राजनीतिक लाभ के लिए दे रहे हैं। सांसद ने कहा कि मुझे राजनीति में आगे लाने की बात कर रहे हैं लेकिन वो यह भूल रहे हैं कि चौटाला परिवार की एंट्री राजस्थान में 1990 के बाद हुई, जबकि मेरे पिताजी 1977 में पहली बार विधायक बन गए थे।