
Now instead of tur, moong is the favorite lentil in the household plates
नागौर. पांच से दस सालों के अंतराल में चना एवं तुअर की दाल जहां लोगों की पहली पसंद बनी हुई थी, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। कोविड-19 के दौर के चलने के साथ मूंग की वैल्यू बढ़ गई। अपनी पोष्टिकता एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने की गुणवत्ता के कारण अब नागौरी मूंग थालियों में ज्यादा नजर आने लगी है। मूंग की इसी गुणवत्ता के चलते अब तुअर, मसूर एवं चना आदि दालें दूसरे नंबर पर आ गई हैं। इस संबंध में शहर दालों की आपूर्ति करने वाले व्यवसायियों से बातचीत हुई तो इनका कहना है कि कोविड-आने के बाद से ही मूंग की मांग बढ़ी है, नहीं तो पहले चना एवं तुअर दाल का ही चलन ज्यादा रहा है।
140 रुपए में बिकी थी तुअर दल
तुअर के दाल की धमक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तकरीबन चार साल पहले तुअर की दर प्रति किलो 140 रुपए किलो तक जा पहुंची थी। उस समय दाल की खरीद करना वीआईपी कल्चर बन गया था। बाद में हालांकि सरकार की ओर से निर्यात के संदर्भ में प्रभावी कदम उठाने के चलते दर में कमी तो आई थी, लेकिन फिर भी प्रति किलो तुअर की दाल की दर नहीं घटी। उस वर्ष इसकी दर प्रति किलो सौ रुपए से ज्यादा की ही रही।
पांच साल पहले व वर्तमान स्थिति पर नजर
वर्तमान भाव
चना दाल- 65
तूर दाल- 94
मूंग -86
मसूर-93
पांच साल पहले यह थी दालों की दर
चना दाल - 58 मार्च 2016
तूअर दाल- 102 2015,
तुअर डाल - 140 मार्च 2016
मूंग दाल- 86 मार्च 2016
मसूर - 80 मार्च 2016
इसलिए कोविड-19 के बाद मूंग बनी खास
मूंग की दाल सुपाच्य होती है। मूंग साबूत हो या धुली, पोषक तत्वों से भरपूर होती है। मूंग की दाल में कार्बोहाइड्रेट, कई प्रकार के विटामिन, फॉस्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हैं। यह अनेक बीमारियों से लडऩे की क्षमता रखते हैं। अंकुरित मूंग दाल में मैग्नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी-6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है। अंकुरित होने के बाद तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स की मात्रा दोगुनी हो जाती है।मात्र एक कटोरी पकी हुई मूंग की दाल में 100 से भी कम केलौरी होती है। मोटापा घटने में मूंग दाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।शोध बताते हैं कि मूंग दाल खाने से त्वचा कैंसर से सुरक्षा भी मिलती है। मूंग की मदद से आसानी से रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है, साथ ही मूंग कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करती है। ये सोडियम के प्रभाव को कम कर देती है, जिससे रक्तचाप बढ़ता नहीं है। मूंग आयरन की कमी को पूरा करने में सक्षम है।अपनी खुराक में मूंग को शामिल करके आयरन की कमी दूर की जा सकती है, जिससे एनीमिया का जोखिम भी अपनी आप कम हो जाएगा।
मूंग अब बन गई पहली पसंद
हालांकि पहले तो तुअर एवं चना दाल आदि लोगों की पहली पसंद थी, लेकिन कोरोना वायरस सरीखी बीमारियों के आने अब लोगों की मूंग में दिलचस्पी बढ़ी है। इससे अब शहर ही नहीं, बल्कि प्रदेश भर में मूंग दाल की खपत बढ़ गई है।
मूलचंद भाटी, अध्यक्ष कृषि उपजमंडी व्यापार मंडल........
मूंग केवल दाल नहीं, बल्कि औषधि है। बीमारियों से लडऩे के साथ ही शरीर को पुष्ट करने का काम मूंग सफलतापूर्वक कर लेती है। इसके अलावा इसका उपयोग पापड़ आदि में भी होता है। पिछले कुछ सालों में मूंग अब लोगों की फस्र्ट च्वाइस के रूप में सामने आई है।
भोजराज सारस्वत, स्पाइस बोर्ड सदस्य.......
मूंग के क्षेत्र में नागौरी मूंग खुद ही एक ब्रांड बन गया है। अपनी गुणवत्ता के कारण यह लोगों के लिए खास बन गई है। यही वजह रही है कि पहले जहां चार से पांच दिनों में मूंग की दाल घरों में बनाई जाती थी। अब यह हर दूसरे दिन लोगों के घरों में बनने लगी है।
महावीर बांठिया, दाल व्यवसायी......
चना दाल भी कम नहीं बिकती है, लेकिन मूंग की गुणवत्ता की वजह से कोविड-19 की बीमारियों में यह काफी प्रभावी सिद्ध हुई है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम सहित अन्य विभिन्न महत्वपूर्ण तत्व होते हैं। इस वजह से भी इसकी खपत बढ़ गई है।
मनोज बांठिया, किराना व्यवसायी..............
Published on:
01 Feb 2022 09:24 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
