नागौर

video–कपास की फसल पर गुलाबी सूंडी का प्रकोप, 48500 हेक्टेयर फसल पर खतरा

- कई बार कीटनाशक स्प्रे करने के बावजूद कीट नही हो रहा नष्ट -किसानों का खर्चा बढा वहीं आमदनी घटकर रह जायेगी आधी- जिले में 63 हजार हेक्टेयर लक्ष्य के विरूद्ध 48.5 हजार हेक्टेयर में हुई कपास की बुवाई

2 min read
Sep 16, 2023
खजवाना. कपास के फल में लगी गुलाबी सूंडी। 

खजवाना. नागौर जिले की प्रमुख वाणिज्यक फसल कपास पर इन दिनों गुलाबी सूंडी का खतरा मंडरा रहा है। किसान कई बार कीटनाशक स्प्रे कर चुके फिर भी यह कीट फसल का पीछा नहीं छोड़ रहा।

गौरतलब है कि इस बार प्रारम्भ में ही समयानुसार बारिश होने से फसल की बढवार अच्छी है लेकिन फल बनने के दौरान गुलाबी सुण्डी के प्रकोप से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि विभाग अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। कृषि पर्यवेक्षक रामजस चौधरी, अनिल कुमार वर्मा, अन्नाराम ईनाणियां खेतों में पहुंचकर किसानों को इसके लक्षण व उपचार के बारे में अवगत करवा रहे हैं। कई खेतों में फैरोमन ट्रेप नामक उपकरण भी लगाए गए, जिनसे गुलाबी सूंडी आने पर तुरंत पता लग जाए और कीटनाशक का छिड़काव किया जा सके।
जानिए क्या है गुलाबी सुण्डी
गुलाबी सूंडी एक प्रकार का कीट है। प्रारम्भिक अवस्था में यह सफेद रंग का होता है और बढने के साथ ही गुलाबी हो जाता है। यह मुख्यत: फसल के पत्तों के निचले भाग में चिपका रहता है। इसका जीवन चक्र 25 से 35 दिवस हैं।

अण्डे से निकलने के बाद यह कीट पौधे के फूल में प्रवेश करता है। फूल की वृद्धि के साथ कीट भी वृद्धि करता है। फूल परिपक्व अवस्था में आने पर मुख बंद कर लेता है। इस दौरान कीट बॉल के अन्दर बीज व रेशे बनाने वाले टिश्यू को नष्ट करता रहता है। इससे कपास की गुणवत्ता व उत्पादन दोनों में कमी देखने को मिलती है।
क्या है उपचार
जिन फूलों की पंखुडि़यां ऊपर से चिपकी हो उन्हें हाथ से तोड़कर नष्ट करें। इसके अलावा मेलाथियॉन 50 ई.सी. की 2 एमएल या सारपरमेथ्रिन 25 ई.सी. की 0.4 एमएल या साइपरमेथ्रिन 10 ई.सी. की 1 एमएल या कार्बेरिल 50 डब्लू पी की 4 ग्राम या डेल्टा मेथ्रिन 2.8 ई.सी. की 1 एमएल या ट्राइजोफॉस 40 ई.सी. की 3 एमएल या फ्लूबेन्डियामाइड 480 एस.सी.की 0.40 एमएल का प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करें।

किसानों की लागत बढ रही, आमदनी आधी से भी कम होने के आसार

गुलाबी सुण्डी के प्रभाव से एक तरफ फसल पर बार-बार दवाई से स्प्रे करने से लागत आधारित खर्चा बढ रहा है, वहीं कपास के उत्पादन में कमी के आसार लग रहे हैं। ऐसे में किसान दोहरी मार का शिकार होगा। जहां प्रति बीघा चार से पांच क्विंटल कपास का अनुमान था, वह घटकर दो से तीन क्विंटल भी नहीं हो पाएगी। किसान सरदार सिंह , सुरेश रोज, सीताराम मुण्डेल, सहदेव लामरोड़, सग्राम चोटिया ने बताया कि समर्थन मूल्य 6600 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन यह लागत के हिसाब से अपर्याप्त है। सरकार को कम से कम 10 हजार रुपए समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए, जिससे किसानों का कपास के प्रति मोह भंग नहीं हो। इधर मजदूरों का कहना है कि कपास निकालने में दुगना समय लग रहा है, क्यों कि फल का मुंह पूरा नहीं खुल रहा है।
क्या कहते विशेषज्ञ
पिंक बॉल वार्म यानि गुलाबी सूंडी से बचाव के लिए किसान बीटी कपास का बीज उपयोग में ले। बीज खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि असली बीटी कपास है की नहीं। कृषि पर्यवेक्षकों की देखरेख में समय पर कीटनाशकों का छिड़काव कर इससे निजात पाई जा सकती है।

शंकर राम सियाक
उप परियोजना निदेशक, कृषि विभाग

नागौर
फसल एक नजर
पंचायत समिति - बुवाई (हेक्टेयर)

मेड़तासिटी-14500
रियांबड़ी-5500

डेगाना-2050
सांजू-2150

मूण्डवा-9800
जायल-1900

डेह-200
नागौर-2800

खींवसर- 9600
योग- 48500

Published on:
16 Sept 2023 12:16 am
Also Read
View All

अगली खबर