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नागौर। राज्य सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की योजना के तहत तीसरे चरण में प्रदेश में एक हजार आरोग्य मंदिर तो खोल दिए, लेकिन इनकी जिम्मेदारी उठा रहे चिकित्साकर्मियों का दस माह से मानदेय अटका दिया।
आयुर्वेद विभाग के अधिकारी सीएचओ का जिम्मा संभालने वाले चिकित्सकों का प्रशिक्षण पूरा नहीं होना बता रहे हैं। वहीं कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर(सीएचओ) का जिम्मा संभाल रहे चिकित्सकों के संघ का कहना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद दस माह से काम कर रहे हैं। इसके बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं किया।
आयुर्वेद विभाग के अनुसार वर्ष 2022-23 में सरकार ने तीसरे फेज में विभिन्न जिलों में 1000 आरोग्य मंदिर खोले थे। यह शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से खोले गए। इनमें योग प्रशिक्षक पुरुष, महिला, सीएचओ, आशा एवं एएनएम को हर माह उनको काम के परफॉर्मेंस के आधार पर मानदेय भुगतान करने की बात कही गई।
चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार पहले एवं दूसरे माह में इनसेंटिव नहीं आने पर बताया कि बजट आने पर दिया जाएगा। छह माह गुजरने पर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सा संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यालय में संपर्क किया। वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
आयुर्वेद विभाग के अनुसार प्रति माह सीएचओ और आशा सहयोगिनी को पांच हजार, नर्स/ कंपाउंडर को दो हजार व एएनएम को दो हजार रुपए मानदेय देने का प्रावधान है। इस तरह से सीएचओ व आशा सहयोगिनी का 50-50 हजार, नर्स/कंपाउंडर का 20 हजार व एएनएम का 20 हजार का मानदेय लंबित है।
अधिकारियों के अनुसार तीसरे फेज में सीएचओ का प्रशिक्षण हुआ था, लेकिन रिफ्रेशर प्रशिक्षण चलने के कारण भुगतान नहीं हुआ। जब तक पूर्ण प्रशिक्षण नहीं होता भुगतान नहीं किया जा सकता है। इसी तरह आशा एवं एएनएम का प्रशिक्षण पूरा हो गया है, लेकिन काम शुरू होने पर ही भुगतान होगा। इधर, तीसरे फेज में कार्यरत योग प्रशिक्षक एवं महिला प्रशिक्षक का भुगतान भी दिसंबर माह तक हुआ है। बताया जाता है कि शेष भुगतान कार्यों की उपलब्धियों के अनुसार होगा।
तीसरे फेज में सभी योग प्रशिक्षकों का भुगतान किया जा चुका है। चिकित्सकों का रिफ्रेशर प्रशिक्षण हाल में हुआ है। इनको कार्य के परफॉर्मेंस के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
-आनंद शर्मा, निदेशक, आयुर्वेद निदेशालय, अजमेर
आरोग्य मंदिरों में सीएचओ का जिम्मा संभालने वाले राज्य के एक भी चिकित्सक को भुगतान नहीं किया गया है। मुख्यालय से संपर्क करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
-डॉ. सुरेश रॉयल, प्रांतीय पीजी प्रतिनिधि, राजस्थान आयुर्वेद चिकित्साधिकारी, संघ
Published on:
21 Jan 2025 11:25 am

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