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बच्चों के दूध पीने को लेकर अधिकारी बेखबर, नहीं किया सत्यापन

जिले के राजकीय शिक्षण संस्थानों में ढाई लाख से ज्यादा बच्चों को सप्ताह में छह दिन दूध पिलाने की शुरूआत तो हो गई, लेकिन निदेशालय के निर्देश के बाद भी जांच के लिए जिला शिक्षाधिकारियों में से किसी ने भी अब तक इसका भौतिक सत्यापन करने की जहमत नहीं उठाई।

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Nagaur patrika

Guinani school again operated in single innings

नागौर. जिले के राजकीय शिक्षण संस्थानों में ढाई लाख से ज्यादा बच्चों को सप्ताह में छह दिन दूध पिलाने की शुरूआत तो हो गई, लेकिन निदेशालय के निर्देश के बाद भी जांच के लिए जिला शिक्षाधिकारियों में से किसी ने भी अब तक इसका भौतिक सत्यापन करने की जहमत नहीं उठाई। अब बच्चे रोजाना दूध का स्वाद ले रहे हैं कि नहीं, इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी नहीं है। वह भी संस्था प्रधानों की ओर से भेजी गई रिपोर्ट को ही अंतिम मानकर इतिश्री कर रहे हैं। निदेशालय की ओर से आए दिशा-निर्देश में जिला शिक्षाधिकारी से राजकीय शिक्षण संस्थानों में नामांकित बच्चों की संख्या, दूध पीने वाले बच्चों की संख्या का पूरे सप्ताह की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही रिपोर्ट भेजने के लिए निर्देश मिले थे। इसके अलावा अब तक की गतिविधियों की बिंदुवत रिपोर्ट मांगने के साथ ही कहा गया था कि जिला शिक्षाधिकारियों की ओर से दूध सेवन किए जाने की अवधि में भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट भी वह जल्द भेज दें। ताकि यथोचित कदम उठाया जा सके। विभागीय जानकारों का कहना है कि इसके बाद भी अब जिला शिक्षाधिकारियों की यहां पर माध्यमिक प्रथम, माध्यमिक द्वितीय एवं प्रारंभिक जिला शिक्षाधिकारियों की तैनातगी होने के बाद भी किसी ने अब जिले के शिक्षण संस्थानों में दूध पिलाए जाने की गतिविधियों का भौतिक सत्यापन नहीं किया। जानकारों का कहना है कि संस्था प्रधानों एवं नोडलों की ओर से भेजी गई रिपोर्ट को ही अंतिम मानते हुए जांच की खानापूर्ति कर ली गई।
बच्चे ही दूध पी रहे हैं या फिर कोई और...!
विशेषज्ञों ने उच्च स्तर पर स्पष्ट रूप से बता दिया था कि अधिकारियों की ओर से निरीक्षण की खानापूर्ति किए जाने की स्थिति में भुगतान व्यय तो विभाग कर देगा, लेकिन योजना पूरी तहस-नहस हो जाएगी। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए निदेशालय की ओर से जिला शिक्षाधिकारियों के लिए स्कूलों में विभिन्न जगहों पर जाकर स्पष्ट रूप से भौतिक सत्यापन किए जाने के निर्देश भी आए थे। अब इसके बाद भी ऐसा नहीं किए जाने के कारण इस पूरी योजना के उद्देशों पर ही सवालिया निशान लगने लगा है।
अधिकारी कहिन...
&इस संबंध में जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक ब्रह्माराम चौधरी एवं प्रारंभिक जिला शिक्षाधिकारी रजिया सुल्ताना से स्कूलों में बच्चों के दूध सेवन के भौतिक सत्यापन की बात की गई तो उनका कहना था कि इस पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट नोडलों से मंगाकर इसकी पुष्टी भी की जा रही है, लेकिन वह कितने स्कूलों में निरीक्षण के लिए गए इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

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