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‘फस्र्ट डिविजनर’ पगार पाने वाले शिक्षक अध्यापन में ‘थर्ड डिविजनर’

जिला मुख्यालय के नोडल विद्यालय में शिक्षकों सहित 50 का स्टाफ होने के बाद भी महज सात विद्यार्थी ही पहली श्रेणी में बमुश्किल बना पाए स्थान, रतन बहन राबाउमावि में भी स्टॉफ सहित दो दर्जन से अधिक शिक्षिकाओं के होने के बाद भी 26 छात्राएं फेल

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Nagaur patrika

Now ask the children whether Guruji gave or not ...

नागौर. पगार मोटी और पढ़ाई के नाम पर शगुन। कुछ इसी तरह का हाल है सरकारी स्कूलों का। जिला मुख्यालय के नोडल सेठ किशनलाल कांकरिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की भारी-भरकम फौज होने के बाद भी 10वीं का बोर्ड परीक्षाफल भी औसत दर्जे का रहा। इस बार आए परिणाम में महज 15 विद्यार्थी ही उत्तीर्ण हो सके। राजकीय रतन बहन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की दो दर्जन से अधिक शिक्षिकाओं की संख्या होने के बाद भी परीक्षाफल में उत्तीर्ण की श्रेणी में नहीं आने वाली छात्राओं की संख्या उत्तीर्ण छात्राओं से ज्यादा रही। हालात ऐसे होने के बाद भी न सरकार को शर्म आ रही है न शिक्षकों को।
कांकरिया में छह सप्लीमेंट्री तो एक फेल
जिला मुख्यालय के नोडल राजकीय सेठ किशनलाल कांकरिया उच्च माध्यमिक विद्यालय में 10वीं की बोर्ड के परिणाम में प्रथम श्रेणी में केवल सात विद्यार्थी ही पास हुए। छह द्वितीय एवं दो तृतीय श्रेणी में पास हो पाए। छह की सप्लीमेंट्री आ गई और एक फेल हो गया। तीन अन्य अनुपस्थित रहे। अनुपस्थितों एवं फेल होने के साथ ही सप्लीमेंट़्री की संख्या जोडऩे के बाद भी पंजीकृत की संख्या महज 25 ही पहुंचती है। यह हालात तब हैं, जबकि यहां पर शिक्षकों सहित पूरे स्टॉफ की संख्या करीब 50 तक है।
ये स्कूल भी फिसड्डी
जिला मुख्यालय के प्रमुख स्कूलों में शामिल राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय रतन बहन की स्थिति भी बेहद खराब रही। यहां पर कुल 94 छात्राएं 10वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत हुई, एक अनुपस्थित रही। कुल 93 में से महज 42 छात्राएं ही उत्तीर्ण हो सकीं। शेष 51 छात्राएं पास की श्रेणी में नहीं आ पाईं। यहां पर शिक्षिकाओं सहित कुल 30 जनों का स्टॉफ है। इसके बाद भी इन विद्यालय की शिक्षिकाओं की पढ़ाई इतनी ज्यादा ‘बेहतर’ रही कि 93 में से 51 छात्राओं के उत्तीर्ण श्रेणी में शामिल नहीं होने से स्थिति विकट ही रही। अब इसी परिणाम से पूरे विद्यालय की शैक्षिक स्थिति एवं शिक्षिकाओं की योग्यता से परिपूर्ण कार्यशैली का अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां पर भी केवल 11 छात्राएं प्रथम, 21 द्वितीय, सात को तृतीय श्रेणी मिली। एक छात्रा अनुपस्थित रही, और 25 की सप्लीमेंट्री आ गई, जबकि 26 छात्राएं फेल हो गई। 24 की सप्लीमेंट्री गणित में आई है, और एक की अंग्रेजी में। साफ है इस विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था की तस्वीर खुद-ब-खुद दिख जाती है।
तो फिर छूट जाती है कइयों की पढ़ाई : शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि असफल होने के बाद ज्यादातर विद्यार्थी तो मानसिक रूप से बिखर जाते हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई का बेहतर वातावरण देने के साथ ही विषय में उन्हें दक्ष करना विद्यालय के शिक्षकों का ही दायित्व होता है। अब ऐसे में दोनों ही प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से फेल होने के बाद कितने विद्यार्थियों ने नियमित अध्ययन जारी रखा या फिर कितनों ने छोड़ दिया, इस पर बातचीत करने से भी जिम्मेदार कतराते रहे। हालात यही रहे तो फिर आखिर सरकार जनता से टेक्स लेकर लाखों की राशि केवल इनके वेतन पर क्यों खर्च करें।
&बोर्ड परीक्षा के परिणामों के संदर्भ में व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। नोडल विद्यालय की स्थिति चिंतनीय है।
ब्रह्माराम चौधरी, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक प्रथम नागौर

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