
इन समस्याओं के लिए मानव की विलासितापूर्ण जीवन शैली और संसाधनों के अत्यधिक विदोहन जिम्मेदार है। ऐसे में पृथ्वी पर मौजूद सीमित खनिज, भूजल और ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। शहर के बांगड़ राजकीय महाविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, भू-संसाधनो की खोज, अन्वेषण, दोहन, संरक्षण के साथ पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रो. पंडित बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पृथ्वी स्वयं अपनी सुरक्षा कर सकती हैं। लेकिन हमें ‘मदर अर्थ’ पर लम्बे कालावधि तक जीवन यापन करने व खुद को सुरक्षित रखने के लिए मौजूदा संसाधनों का उपयोग समझदारी से करना चाहिए।
प्रोफेसर पंडित ने अंटार्कटिका के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने वहां शोध के दौरान विश्व के विभिन्न देशों के वैज्ञानिको के साथ मिलकर पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन के दुष्प्रभाव का अध्ययन किया और वहां मौजूद पुराजलवायु के रिकॉर्ड के साथ विभिन्न भूवैज्ञानिक स्टडीज के आंकडों को इक_ा किया। उन्होंने वहां की जलवायु, मौसम और मौजूद सीमित जीवों की जानकारी दी।
कालेज के भूविज्ञान विभाग के पूर्व में करीब ढाई दशक तक विभागाध्यक्ष रहे व सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. एन. एम. खण्डेलवाल ने भूविज्ञान के क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की चर्चा करते हुए राष्ट्र विकास में भूवैज्ञानिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कालेज प्राचार्य डॉ. प्रेमचंद ने भूसंसाधनों के अत्यधिक विदोहन से संसाधनों पर बढ़ते दबाव पर चिंता जताई और नए वैज्ञानिक अनुसंधान पर बल दिया। उपाचार्य डॉ. सी. पी. गौड़ ने पृथ्वी के वातावरण को शुद्ध रखने व संसाधनों के विवेकपूर्ण विदोहन का आह्वान किया। भूविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरूण व्यास ने पृथ्वी पर मानव, जीव व पादप जगत के लिए ग्लोबल वार्मिंग को बड़ा खतरा बताते हुए मानव की गतिविधियों के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन पर चिंता जाहिर की। सेमिनार में जेएनयू दिल्ली में शोधार्थी व व्याख्याता, डूंगर कालेज बीकानेर और सेंट विल्फ्रेड कालेज जयपुर के व्याख्याता व विद्यार्थियों, कुचामन कालेज के व्याख्याता के साथ केन्द्रीय भूजल बोर्ड, खान एवं भूविज्ञान विभाग राजस्थान के वैज्ञानिकों तथा बांगड़ कालेज के व्याख्याताओं व विद्यार्थियों ने सहभागिता कर अपने शोध पत्रों का वाचन किया। उन्होंने पावर पाइंट प्रजेंटेशन के साथ ओरल प्रस्तुतियों के अलावा पोस्टरों के माध्यम से भी विभिन्न विषयों की जानकारी दी। कला संकाय के अधिष्ठाता डॉ एन. आर. ढाका ने नेशनल सेमिनार की थीम पर चर्चा करते हुए संसाधनों के उपलब्धता व आपूर्ति में अंतर पर चिंता जताई। साथ ही इनके नए स्त्रोतों की खोज व अनुसंधान पर वैज्ञानिको को कार्य करने का आह्वान किया। सेमिनार के वाईस चैयरमेन डॉ. जहांगीर कुरैशी, कन्वीनर विजयपाल मीना व सचिव डॉ. अजय शर्मा ने सभी पत्रों को ज्ञानवर्धक बताया। समन्वयक पी. के. मीना व छात्रसंघ अध्यक्ष महेन्द्र जैवरिया ने सभी प्रतिभागियों का आभा ज्ञापित किया।
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