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VIDEO…बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए उमड़ा श्रद्धा का ज्वार, चढ़े बिल्वपत्र, सजी झांकी

नागौर. सावन के अंतिम सोमवार को शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महादेव को जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक करने के साथ ही बिल्वपत्र एवं धतूरा आदि अर्पित करने की श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। मंदिरों में श्रद्धालुओं के अर्चन से माहौल आस्था के रंग में रंगा रहा। इसी क्रम में प्रतापसागर पाल स्थित बड़लेश्वर महादेव […]

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नागौर. सावन के अंतिम सोमवार को शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महादेव को जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक करने के साथ ही बिल्वपत्र एवं धतूरा आदि अर्पित करने की श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। मंदिरों में श्रद्धालुओं के अर्चन से माहौल आस्था के रंग में रंगा रहा। इसी क्रम में प्रतापसागर पाल स्थित बड़लेश्वर महादेव मंदिर परिसर में १५१ बर्फ की शिलाओं से अमरनाथ की गुफा की तर्ज पर बाबा बर्फानी की झांकी सजाई गई। करीब ११ हजार किलो की बर्फ से सजे बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
शहर के प्रतापसागर पाल स्थित बड़लेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सावन के अंतिम सोमवार को बाबा बर्फानी की झांकी सजी। बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए आसपास के श्रद्धालुओं की भीड़ महादेव के जयघोष के साथ पूजन के लिए पहुंची तो पूरा माहौल महादेव के रंग में रंगा नजर आया। महंत जानकीदास महाराज, ओंकार सनातन वेद शक्ति पीठ फागली के महंत स्वामी लक्ष्मीनारायण दास, रामनामी संत मुरलीराम महाराज व जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने बाबा बर्फानी की महाआरती की। महाआरती के दौरान प्रतापसागर तालाब की पाल सहित आसपास का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से भरा रहा। नया दरवाजा हनुमान मंदिर एवं प्रतापसागर पाल के साथ ही सोनीबाड़ी से बाबा बर्फानी की ओर आने वाले रास्ते पूरी तरह से श्रद्धालुओं से भरे रहे। श्रद्धालुओं को क्रमबद्ध तरीके से दर्शन कराने के लिए लगे स्वयंसेवक भीड़ को बमुश्किल नियंत्रित करने में लगे रहे। श्रद्धालुओं में हर कोई बाबा बर्फानी के दर्शनों के साथ उनका आशीर्वाद पाने की होड़ में लगा रहा। धर्म कला संस्कृति साहित्य समिति की ओर से समिति के संरक्षक श्रद्धानंद तिवारी के मार्गदर्शन में बनी राम दरबार, शिव दरबार एवं राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी भी आस्था का केन्द्र बनी रही। इस दौरान शरद कुमार जोशी, नृत्यगोपाल मित्तल, हरिराम धारणिया, अनिल कुमार बांठिया, विमलेश समदडिय़ा, सरोज प्रजापत, भोजराज सारस्वत, नवरत्न बोथरा, रामकुमार भाटी, रामकिशोर सारड़ा आदि मौजूद थे।
त्रिशूल एवं बर्फ पर बैठा रहा कबूतर
बाबा बर्फानी के त्रिशूल एवं इनके पास बर्फ की शिला पर बैठे दो कबूतर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बने रहे। अमरनाथ गुफा की तर्ज पर सजे श्रद्धालु बाबा बर्फानी के साथ ही दोनो कपोतों को भी श्रद्धा से नमन करते नजर आए।