No video available
नागौर. राज्य सरकार ने सालों के बाद आयुर्वेद विभाग की सुध ली है। विभाग के औषधालयों में सफाई के लिए प्रति माह मिलने वाली राशि को 115 रुपए से बढ़ाकर 500 कर दिया है। विडम्बना यह है कि पहले 115 रुपए में सफाई नहीं हो पाती थी, अब पांच सौ रुपए होने के बाद भी इस राशि में सफाई होना कैसे संभव है। इस संबंध में राजस्थान आयुर्वेद चिकित्साधिकारी संघ का मानना है कि सफाई मद में दी जाने वाली राशि में हालांकि चार गुना वृद्धि की गई है, लेकिन महंगाई के दौर में 500 रुपए प्रतिमाह में कोई भी सफाईकर्मी सफाई करने के लिए तैयार नहीं होगा। सरकार को राशि और बढ़ानी चाहिए थी।
नहीं सुधरेंगे औषधालयों के हालात
प्रदेश में तीन हजार से ज्यादा आयुर्वेद चिकित्सालय हैं। इसमें 90 प्रतिशत से ज्यादा औषधालय है। इनमें लंबे समय से सफाई को लेकर समस्या बन हुई है। पिछले पैतीस साल से विभाग के औषधालयों की सफाई के लिए मात्र 115 रुपए दे रहा था। इस राशि में औषधालयों की सफाई के लिए कोई भी तैयार नहीं होता था। राशि बढऩे के बाद भी कोई खास सुधार नहीं होने वाला
प्रदेश में आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की संख्या
जिला संख्या
अजमेर – 138
अलवर – 185
बांसवाड़ा – 115
बारां – 63
बाड़मेर -97
भरतपुर-138
भीलवाड़ा -189
बीकानेर- 108
बूंदी -64
चित्तौडगढ़- 102
चुरू -117
दौसा -101
धौलपुर-55
डूंगरपुर-121
श्रीगंगानगर-87
हनुमानगढ़- 97
जयपुर- 306
जैसलमेर 35
जालोर-71
झालावाड़ -82
झुंझुनूं- 159
जोधपुर- 125
करौली- 79
कोटा- 60
नागौर- 161
पाली – 143
प्रतापगढ़- 51
राजसमंद- 96
सवाईमाधोपुर- 88
सीकर- 164
सिरोही 66
टोंक – 104
उदयपुर- 184
पांच सौ रुपए में मजदूर तक नहीं मिलता
सूत्रों के मुताबित पिछले पैतीस में कई सरकारें आई, लेकिन आयुर्वेद विभाग पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। वर्तमान सरकार ने सुध तो ली है पर औषधालयों के सफाई मद में बढ़ाई गई राशि अपर्याप्त है। राजस्थान आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी संघ का मानना है कि 500 में तो घर के काम के लिए कोई मजदूर तक नहीं मिलता है। पूरे महिने पांच सौ रुपए में सफाई करने को कौन तैयार होगा।
इनका कहना है…
परिचारक विहीन औषधालयों में सफाई कराने के लिए प्रतिमाह 500 रुपए का प्रावधान किया गया है। इस संंबंध में आदेश प्रदेश के सभी जिलों में विभागीय अधिकारियों को भेज दिए हैं।
डॉ. आनन्द शर्मा, निदेशक, निदेशालय, आयुर्वेद विभाग अजमेर