CG Election 2023 : मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही है।
नारायणपुर। cg election 2023 : अबूझमाड़ क्षेत्र में मतदान की अलख जगाने में पीछे नहीं है। मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही है। लेकिन शासन-प्रशासन अपनी सुरक्षा का पहले ध्यान दे रहा है। इससे अबुझमाड़ के 18 मतदान केंद्रों को सुरक्षा के लिहाज से परिवर्तित किया गया है। मतदान केंद्र को परिवर्तित करने के दौरान मतदाताओं की सुविधाओं का कोई ध्यान नहीं रखा गया है।
इससे यदि ग्रामीणों को वोट डालना है, तो उन्हें मिलो का सफर पैदल तय करना होगा। सरकारी व्यवस्था का ही नतीजा है, कि माड़ में नक्सलवाद के भय से बैक$फुट पर उतरे प्रशासन की इस कार्रवाई से वोङ्क्षटग प्रतिशत लगातार घट रहा है। अबुझमाड़ के 28 मतदान केंद्रों में से 80 फ़ीसदी मतदान केंद्रों को स्थानांतरित कर दिया गया है। मतदान केंद्रों की दूरी से ग्रामीण चलकर भी वोट डालने नहीं पहुंच पाते हैं।
सरकार की पहुंच से दूर
नक्सलियों से प्रभावित 4 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। नक्सलीदहशत के चलते सरकार की पहुंच इस क्षेत्र में नहीं के बराबर है। इससे अबुझमाड़ क्षेत्र के ग्रामीणो को मूलभूत सुविधा पाने के लिए जदोजहद करनी पड़ती है। इस क्षेत्र में पीने के पानी से लेकर आवागमन की सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। शासन-प्रशासन की लापरवाही का नतीजा अबूझमाड़ में निवासरत ग्रामीणों को भुगतने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस क्षेत्र में निवासरत ग्रामीणों को सुविधा मुहैया कराने की बजाय शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि अबुझमाडिय़ो से सुविधा छिनने में लगे हैं।
इधर कुछ साल से इन विस्तृत इलाकों का सर्वे किया जा रहा है। जिससे सुविधा मिल सके।
नक्सलियों से प्रभावित अबुझमाड़ क्षेत्र में विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण करने के लिए नक्सलियों की दहशत के चलते अबूझमाड़ के 28 मतदान केदो में से 18 मतदान केदो को स्थानांतरित किया गया है। इन 18 मतदान केंद्रों को 7 गांव में स्थानांतरित किया है। इससे 115 गांव के मतदाताओं को मतदान के लिए 7 गांव में पहुंचकर अपने मत का प्रयोग करना पड़ेगा। यही वजह है कि गत तीन विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत घटा है। जिला भले ही दो ब्लॉक का है।
लेकिन अबुझमाड़ ओरछा का इलाका पूरी तरह से आम लोगों से कटा रहा है। इस क्षेत्र में बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी रोक थी। लेकिन करीब 15 साल पहले इस इलाके में आवाजाही शुरू हुई। इस बीच बस्तर में पाव पसारे नक्सलियों ने इस इलाके को अपनी शरणास्थली बना लिया। अब जब प्रशासन ने यहां दस्तक देने का प्रयास किया तो उसे हर बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे विषम एवं भौगोलिक परिस्थितियों से अनकूल अबुझमाड़ अस्सी फीसदी क्षेत्र आज भी नक्सलियों का आधार इलाका है।