
CG News: एक दौर में जहां नक्सलियों की गोली की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब अबूझमाड़ के कुतुल में पहली बार ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक गीतों पर ग्रामीणों के सामूहिक नृत्य की गूंज सुनाई दी। गुरुवार शाम 7 बजे से शुरू हुआ मेला शुक्रवार सुबह 8 बजे तक चला, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने निर्भय होकर हिस्सा लिया।
इस ऐतिहासिक मेले में ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में देवी-देवताओं से आशीर्वाद लिया और जमकर नाचे-गाए। मेले में सुबह होते ही ग्रामीण दुकानें और स्टॉल्स से रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदते दिखे। पकवानों में चाऊमीन, मोमोज, भजिए, बर्फ के गोले और आइसक्रीम जैसी शहरी स्वाद भी पहली बार कुतुल में उपलब्ध रहे, जिन्हें बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने खूब पसंद किया।
हालांकि, मेले में जिला प्रशासन की भागीदारी न के बराबर रही। न तो पीने के पानी की व्यवस्था की गई, न ही नृत्य स्थल पर पर्याप्त रोशनी और न ही रुकने के लिए छांव की सुविधा। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर व्यवस्थाएं संभालीं, लेकिन प्रशासन की दूरी ने एक बड़े अवसर को ऐतिहासिक रूप देने से रोक दिया।
अबूझमाड़ में पुलिस कैप की स्थापना और सुरक्षा व्यवस्था के चलते इलाके की फिजा बदलती नजर आ रही है। नक्सलवाद से मुक्ति की ओर बढ़ते कुतुल में अब ग्रामीण सामूहिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। इस बार व्यापारी भी बड़ी संया में मेले में पहुंचे, जिससे गांव के बाजार में रौनक रही।
Updated on:
03 May 2025 01:00 pm
Published on:
03 May 2025 12:59 pm
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