पुलिस के जांच की गति देख कछुए को भी आ जायेगी शर्म, 4 साल बाद भी आरोपी काट रहे मौज

पुलिस के जांच की गति देख कछुए को भी आ जायेगी शर्म, 4 साल बाद भी आरोपी काट रहे मौज

Karunakant Chaubey | Updated: 14 Jul 2019, 06:12:35 PM (IST) Narayanpur, Narayanpur, Chhattisgarh, India

Chhattisgarh: रिपोर्ट दर्ज हुए चार साल का समय बित गया है। लेकिन पुलिस (Police) की विवेचना बस कागजों तक सीमित होकर रह गई है

नारायणपुर. Chhattisgarh: राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत अबूझमाड ओरछा ब्लॉक के 15 स्कूलों में निर्माण कार्य स्वीकृत किये गये थे। इन निर्माण कार्य को पूरा करने का जिम्मा जनभागीदारी समिति एवं ग्राम पंचायतों को सौपा गया था। लेकिन जनभागीदारी समिति एवं पंचायतों ने निर्माण कार्य को किये बिना स्वीकृत राशि आहरण कर गबन कर लिया था।

इस मामलें का खुलासा होने पर ओरछा थाने में इस मामले को लेकर एफ आईआर दर्ज कर पुलिस (Police) विवेचना में जुट गई थी। लेकिन रिपोर्ट दर्ज हुए चार साल का समय बित गया है। लेकिन पुलिस की विवेचना बस कागजों तक सीमित होकर रह गई है। इस लापरवाही के चलते पुलिस 4 साल बितने के बावजूद गबन के आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है।

जानकारी के अनुसार राजीव गांधी शिक्षा मिशन द्वारा 2003 से लेकर 2006 तक ओरछा ब्लॉक के विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्कूल भवन सहित अतरिक्त कक्ष निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान कर जनभागीदारी समिति एंव ग्राम पंचायतों के खाते में निर्माण कार्य की राशि को जमा कराया गया था। लेकिन निर्माण कार्य के लिए बनाई गई एंजेसियों ने निर्माण कार्य पूरा किये बिने पूर्ण राशि का आहरण करते हुए गबन कर लिया था।

ओरछा ब्लॉक के करीब 15 स्कूलों में निर्माण कार्य किये बिना पूर्ण राशि का आहरण कर गबन करने को लेकर ओरछा के सोनारू, मसीहा एवं कोये द्वारा मुख्यमंत्री को लिखित पत्र भेजकर इस मामले की शिकायत की थी। इस पत्र के मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारी को इस मामले की पूर्ण जानकारी भेजने के लिए अवगत राया था। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस पूरे मामले की भापकर 22 अगस्त 2014 पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने के लिए निवेदन किया था।

मामला छोटेेडोंगर अनुविभागीय अधिकारी के अंतर्गत होने के कारण पुलिस अघीक्षक ने छोटेडोंगर एसडीओपी को इस मामले की जांच करने के निर्देश दे दिये थे। छोटेडोंगर एसडीओंपी ने प्रतिवेदन जांच पर कार्य पूर्ण नहीं होने से जांच पर अपराध घटीत हो जाने से 25 मई 2015 को अपराध क्रमांक 04/15 के तहत भादवी के धारा 409 एंव 420 के तहत पंजीबद्ध करते हुए विवेचना में ले लिया था।

लेकिन 4 साल बितने के बावजूद पुलिस (Police) मामले की विवेचना पूरी नहीं कर पाई है। इस मामले की विवेचना कागजों तक सीमित होने के कारण पुलिस 4 साल बाद भी गबन के आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। इससे शासन को लाखों रुपए का चूना लगते नजर आ रहा है। इसके बावजूद इस पर किसी का ध्यान नहीं जाना समझ से परे जान पड़ता है।

इन जगहों पर होना था निर्माण कार्य

राजीव गांधी शिक्षा मिशन ने 2003-04 में होकपाड एवं हिकपाड गांव के प्राथमिक शाला में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 75-75 हजार, माध्यमिक शाला नेडनार में अतरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 1 लाख की स्वीकृति प्रदान कर राशि जारी कर दी गई थी। इसके साथ 2005-06 में परपा, कंदाडीपारा, कटुलनार, कोडनार एव गट्टाकाल गांव के प्रत्येक प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए 4 लाख 35 हजार रूपए, अचेली एंव कोडेनार गांव प्रत्येक नवीन प्राथमिक शाला भवन के लिए 2 लाख, उसेबेड़ा, निरामेटा, मोहंदी गांव के प्रत्येक नवीन प्राथमिक शाला भवन के लिए 5 लाख 17 हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की गइ थी।

इस तरह ओरछा विकासखण्ड में 15 स्कूलों में निर्माण कार्य के लिए कुल 48 लाख 93 हजार रूपए जारी करते हुए जनभागीदारी समिति एंव ग्राम पंचायतों के खाते में जमा कर दी गई थी। लेकिन निर्माण कार्य में लगी निर्माण एजेंसी ने निर्माण कार्य पूर्ण किये बिना सम्पूर्ण राशि का आहरण कर पैसा गबन कर लिया था।

इन बिंदुओं पर मांगी जानकारी

छोटेडोंगर एसडीओपी ने गबन के मामले को संज्ञान में लेकर इस मामले की विवेचना करते हुए ओरछा ब्लॉक के सीईओं को कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसमें निर्माण कार्यों का निर्माण कार्य हेतु स्वीकृत आदेश, निर्माण कार्य के लिए किसे निर्माण एजेंसी बनाया गया उसके आदेश की प्रति, निर्माण कार्य हेतु कब कार्यादेश जारी किया गया था, निर्माण कार्य कुल राशि का आहरण किया गया संबंधित रिकार्ड, सक्षम अधिकारी द्वारा कब-कब मूल्याकंन प्रमाण पत्र जारी किया उसके निर्माण कार्य की माप पुस्तिका, निर्माण कार्य ग्राम पंचायत या शासकीय एजेंसी द्वारा कराया गया ।

उसके मजदूरों की उपस्थिति पंजी मस्टर रोल, निर्माण कार्यो का सक्षम अधिकारियों के टीम से मुल्याकन कर एजेंसी द्वारा हेडओव्हर से संबधित दस्तावेज, निर्माण कार्य में सलिप्त संरपच, सचिव, ठेकेदार, सब इंजीनियर की जानकारी। इस तरह पुलिस विभाग ने जनपद पंचायत ओरछा के सीईओं को पत्र व्यवहार करते हुए बिदुओं पर जानकारी मांगी थी।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned