
उदासीनता...2 लाख 26 हजार मच्छरदानी की है आवश्यकता, लेकिन अभी आई नहीं पूरा साल निकला नहीं बटी मच्छरदानी
होशंगाबाद/इटारसी. केसला विकासखंड आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों में सबसे आगे रहता है। यहां हर साल मलेरिया और डेंगू के ज्यादा मरीज मिलते हैं। विकासखंड में अब तक मच्छरदानी का वितरण नहीं हो पाया है। अब आदिवासियों को नए साल में ही मच्छरदानी मिलने की उम्मीद है। मलेरिया विभाग ने २ लाख २६ हजार मच्छरदानी बुलाई है हालांकि सप्लाई अभी तक नहीं हुईं है। वहीं अधिकारी सप्लाई में लगभग एक माह का समय और लगने की बात कह रहे हैं। मच्छरदानियों की सप्लाई समय पर नहीं हुई इस वजह से अब इनका वितरण नए साल में ही संभव हो पाएगा।
1. मच्छरदानियों की सप्लाई बैतूल को हो गई है, वहां से होशंगाबाद जिले में मच्छरदानी की खेप हर ब्लॉक में की जाएगी।
अरुण श्रीवास्तव, डीएमओ होशंगाबाद
22 दिन चला सघन अभियान
मलेरिया विभाग द्वारा 12 नबंवर से अभियान शुरू किया गया था। लगभग 22 दिन विभाग के मैदानी अमले ने दूरस्थ गांवों में घूम-घूमकर संदिग्ध मरीजों की जांच की। हालांकि यह सर्वे भी अब बंद हो गया है। विभाग ने पॉजीटिव मरीजों के घरों के आसपास एक्टीविटी भी कराईं। हालांकि अब सर्वे का काम भी सुस्त पड़ गया है। यदि समय पर मच्छरदानी की सप्लाई होती तो ये मैदानी कर्मचारी ही इसका वितरण करते। हालांकि संविदा पर रखे गए इन कर्मचारियोंं का कार्यकाल खत्म होने पर विभाग को मच्छरदानी का वितरण करने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
ब्लॉक में नहीं एलाइजा किट
केसला ब्लॉक में डेंगू व चिकनगुनिया की जांच के लिए संसाधन ही नहीं है। सुखतवा सीएचसी में जरूरी एलाइजा किट नहीं है। अस्पतालों में डेंगू के लक्षण वाले मरीजों का एस-1 टेस्ट (प्रारंभिक जांच) किया जाता है। इसमें पॉजीटिव मिलने पर एलाइजा टेस्ट कराया जाता है। एक किट में 90 लोगों की जांच हो जाती है। हालांकि पूरे विकाखंड के लोगों को इसके लिए मुख्यालय पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मुख्यालय की लैब में ही जांच की सुविधा उपलब्ध होने की वजह से आदिवासियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है।
डेंगू मरीजों पर एक नजर
वर्ष -२०१६
३७ -मरीज
वर्ष -२०१७
३९ -मरीज
वर्ष- २०१८
१२ - मरीज
मच्छरदानी के वितरण के लिए 7.80 लाख का बजट
होशंगाबाद. मलेरिया हाईरिस्क जोन के अंतर्गत आने वाले सातों ब्लॉकों में के प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले 2.26 लाख परविारों को नि:शुल्क मच्छरदानी का वितरण जनवरी तक किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी की खेप बैतूल तक भेज दी है। अब बैतूल डीएमओ इनको होशंगाबाद भेजने की व्यवस्थाएं करेंगे। सभी मच्छरदानी ब्लॉकों को सीधे सौंपी जाएगी। वहीं मलेरिया विभाग जनवरी माह के अंत तक इनको वितरित करने की व्यवस्थाएं कराएगा। हालांकि आचार संहिता के कारण मच्छरदानी की सप्लाई करने में विभाग ने देरी कर दी है ।
मच्छरदानी के वितरण के लिए 7.80 लाख का बजट: जिला मलेरिया कार्यालय में इन मच्छरदानी को वितरित करने की व्यवस्था के लिए करीब 7.80 लाख का बजट का आवंटन किया गया है। जोकि वितरित होने के पहले मच्छरदानियों के रख-रखाव के लिए किया गया है।
एक नजर मच्छरदानी
सुखतवा- 34000
बनखेड़ी- 32400
पिपरिया -40600
सोहागपुर- 13900
बाबई -30000
डोलरिया- 10500
सिवनीमालवा -65400
स्वाइन फ्लू के वार्ड को बना दिया केबिन
जिले में अब तक स्वाइन से पीडि़त दो मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं डेंगू के भी अब तक १२ व चिकनगुनिया के ६ मरीज मिल चुके हैं। बीमारियां भले ही अपने पैर पसार रहीं हो लेकिन इसके लिए एसपीएम अस्पताल प्रबंधन गंभीर नहीं है। आलम यह है कि अस्पताल प्रबंधन ने स्वाइन फ्लू के वार्ड को केबिन बना रखा है। इसमें संबंधित प्रभारी की कुर्सी टेबिल लगी हुई है जबकि एक भी व्यवस्थित बेड नहीं है। साथ ही वार्ड में अधिकतर समय ताला लगा रहा रहता है। स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए शासन ने गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत वार्ड में 5 बेड होने के साथ ही संबंधित दवाएं मौजूद होना चाहिए। वहीं संबंधित स्टाफ की भी पूरी जानकारी होना चाहिए जिससे पीडि़त मरीज के आने पर अस्पताल प्रबंधन त्वरित कार्रवाई कर सके। हालांकि सैंपल लेने के लिए एमडी डॉक्टर का होना जरूरी है जबकि अस्पताल में कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।
Published on:
09 Dec 2018 06:55 pm
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