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अनोखा शिवलिंग: सांप के बिल की माटी से होता है निर्माण, 1000 भक्त करते हैं शिवार्चन

सावन सोमवार के दिन 1000 शिवभक्त करते हैं यहां शिवार्चन

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savan somwar

होशंगाबाद. सावन का महीना रविवार से शुरू हो रहा है। गायत्री परिसर स्थित विंध्याचल शेड में हर साल श्रावण मास में भगवान शिव के पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक होता है, जिसका निर्माण सांप के बिल से मिट्टी लाकर किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी पिछले कई सालों से निभा रहे समिति के तीस लोग। उक्त आयोजन शिवार्चन समिति के तत्वाधान में 30 साल से अनवरत जारी है। जिसमें प्रतिदिन करीब 500 शहरवासी शामिल होते हैं। सावन सोमवार के दिन करीब 1000 शिवभक्त यहां शिवार्चन करने के लिए पहुंचते हैं। 30 लोगों की इस समिति में सभी लोगों के काम बंटे हुए हैं। समिति सदस्य ने बताया कि अभिषेक तिवारी प्रतिदिन नित्य रूप से एक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर महारूद्राभिषेक करते है। प्रतिदिन भोलेनाथ का अलग अलग रूपों में भगवान का आकर्षित श्रृंगार किया जाता है। प्रतिदिन भगवान के दो अभिषेक किए जाते है पहला महारूद्राभिषेक और दूसरा उत्तर अभिषेक। सावन सोमवार को मुंबई, दिल्ली, रायपूर, बिलासपुर, भोपाल व इंदौर के लोग शामिल होते है। वहीं समिति सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन की बड़ी विशेषता यह है कि आयोजन के पहले साल से जो व्यवस्थाएं बटी हुई है वे आज तक वैसी ही है। इसमें भगवान की मिट्टी लाने का काम मुन्ना ग्वाला, जल गोविंद राय, गजेन्द्र सिंह राजपूत पूजन सामग्री, कार्यक्रम व्यवस्था अशोक द्विवेदी ने किया है।
सांपो के बिलो की आती है मिट्टी - समिति सदस्यो ने बताया कि भगवान की शिवलिंग बनाने के लिए शहर के खेतो से सांपो के बिलो की मिट्टी एकत्रित की जाती है। जिससें भगवान शिवजी की शिवलिंग बनाकर तैयार की जाती है। साथ ही अलग अलग तरह से भगवान का रूप श्रावण से पूर्णिमा एक माह तक तैयार किया जाता है।

विभिन्न तीर्थ स्थलों के जल से होता अभिषेक

श्रावण माह में एक माह तक भगवान का अभिषेक बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगासागर, गंगोत्री, नर्मदा का जल सहित अन्य पवित्र स्थानों का जल एकत्रित कर अभिषेक किया जाता है। वहीं पहली बारिश का जल भी एकत्रित किया जाता है ताकि अच्छी वर्षा हो।
प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं पौधे

श्रावण मास की हरियाली अमावस्या पर हर साल अभिषेक करने पहुंच रहे श्रृद्धालुओं को प्रसाद के रूप में पौधे दिए जाते है। समिति सदस्य ने बताया कि पर्यावरण सरंक्षण के संदेश को लेकर हरियाली अमावस्या ही पौधे वितरीत किए जाते है ताकि सभी अपने घर के आसपास एक पौधारोपित करे। करीब 200 से 250 देव व औषधीय पौधे प्रसाद स्वरूप दिए जाते है।

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