
ये क्या कलेक्टर सुन रहे थे लोगों की समस्याएं, अधिकारी ऑनलाइन जूते खरीदने और फिल्म देखने रहे में रहे व्यस्त, देखें तस्वीरें
होशंगाबाद। सरकार बदल गई, लेकिन न अफसरों का रवैया बदला और न ही काम का तरीका। जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ स्पष्ट हिदायत दे चुके हैं कि लोगों की समस्या जिलों में ही निपटे, उन तक पहुंची तो कार्रवाई होगी। लेकिन हर मंगलवार को लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई में कलेक्टर आशीष सक्सेना की मौजूदगी के बाद भी अधिकारी गंभीर नहीं थे। लोगों की फरियाद सुनने की जगह अधिकारी ऑनलाइन शापिंग करने से लेकर फिल्म देखने, गेम खेलने और चैटिंग करने में व्यस्त नजर आए। जिन्हें पत्रिका रिपोर्टर ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में जिले भर से आए लोग अपनी शिकायतें लेकर यहां उनके निराकरण कराने आए थे। कक्ष में खुद कलेक्टर सक्सेना मौजूद थे और लोगों की अर्जियां ले रहे थे। इस दौरान मौजूद कई अधिकारी मोबाइल पर व्यस्त थे।
गेम खेलने में रहे व्यस्त : इनके अलावा भी करीब एक दर्जन अधिकारी मोबाइल पर व्यस्त थे। इनमें कुछ न्यूज पढ़ रहे थे तो कुछ गेम खेलने और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
मोबाइल बाधा बना तो कार्रवाई करेंगे: कलेक्टर
कलेक्टर आशीष सक्सेना का कहना है कि अधिकारियों से अपेक्षा है कि जनसुनवाई में दूरदराज से आने वाले आवेदकों की समस्याएं अविलंब निराकृत होना चाहिए। किसी भी आवेदक को अपनी समस्या या शिकायत के लिए भटकना न पड़े। अगर मोबाइल के कारण इस पर बाधा पड़ी तो कार्रवाई भी होगी। वैसे कई बार अधिकारियों के पास वाट्सएप पर विभागीय संदेश भी आते हैं।
जुर्माने की चेतावनी : जिला स्तरीय इस जनसुनवाई में पूरे जिले से 170 शिकायती आवेदन आए। कलेक्टर ने कहा कि पोर्टल पर आवेदन पर की गई कार्रवाई की जानकारी दर्ज नहीं करने पर 500 रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जिसे आवेदक को आने जाने के खर्च के रूप में दिया जाएगा।
जब खुली कलई तो मौके पर लगाया जुर्माना : रेशम हरित आजीविका केन्द्र कोठरा में किसान महिला समूह को अक्टूबर २०१८ में रेशम विभाग को प्रदान किए गए ककून की राशि प्राप्त न होने की शिकायत की। वे इससे पूर्व 8 जनवरी को भी जन सुनवाई में आवेदन दे चुकी है, लेकिन इस संबंध में कोई सुनवाई नहीं हुई है। कलेक्टर ने तुरंत ऑनलाइन पोर्टल चैक कराया। लेकिन रेशम विभाग द्वारा इस आवेदन पर की गई उस पर कार्रवाई की कोई टीप दर्ज नहीं थी। इस पर कलेक्टर ने रेशम विभाग के अधिकारी को मौके पर ही महिलाओं को क्षतिपूर्ति के रूप में 500 रूपये देने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि यदि किसी कारणवश आवेदन पर शीघ्र कार्रवाई कर पाना संभव नहीं है तो भी अधिकारी जन सुनवाई पोर्टल पर अपनी टीप अवश्य दर्ज करें। उन्होने प्रभारी अधिकारी जन सुनवाई को निर्देशित किया कि आवेदको को प्रदान की जाने वाली पावती में एक माह बाद की जन सुनवाई की तारीख लिख कर दें ताकि उन्हें बार बार आकर परेशान न होना पडें तथा कार्यवाही के लिए अधिकारियों को भी समय मिल सके।
यह हैं, अधिकारी एसके सिसौदिया वे अपने मोबाइल फोन से ऑनलाइन जूते की खरीदी कर रहे थे। वे शॉपिंग के लिए जूते पसंद करने में लगे रहे।
यह हैं योजना अधिकारी यूएस पठारिया। जनसुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर व्यस्त थे। वे वाट्सएप पर मैसेज पढ़ रहे थे।
Published on:
23 Jan 2019 01:38 pm
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