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पूर्व नपाध्यक्ष के खिलाफ ईओडब्ल्यूडी की शिकायत नस्तीबद्ध हुई

-नर्मदापुरम के आरटीआई कार्यकर्ता ने दर्ज कराया था प्रकरण

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पूर्व नपाध्यक्ष के खिलाफ ईओडब्ल्यूडी की शिकायत नस्तीबद्ध हुई

पूर्व नपाध्यक्ष के खिलाफ ईओडब्ल्यूडी की शिकायत नस्तीबद्ध हुई

narmdapuramनर्मदापुरम. आटीआई रोड शांतिनगर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सीताशरण पांडे के व्दारा ईओडब्ल्यूडी भोपाल में पूर्व नपाध्यक्ष माया नारोलिया के उनके कार्यकाल के दौरान लगाए गए भ्रष्टाचार व संपत्ति अर्जित करने संबंधी दर्ज शिकायत 82/2016 को जांच के उपरांत नस्तीबद्ध कर दिया गया है। इसकी जानकारी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) मप्र भोपाल ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में माया नारोलिया को दी है। इसमें ईओडब्ल्यू की सहायक महानिरीक्षक (अपराध) एवं लोक सूचना अधिकारी पल्लवी त्रिवेदी ने बताया ने जानकारी दी है कि मुख्यालय में उक्त शिकायत का परीक्षण कराया गया था। शिकायत को 28 नवंबर 2022 को नस्तीबद्ध कर दिया गया है। इसके साथ ही ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक इकाई भोपाल को भी इसकी जानकारी भेजी है। इसमें उल्लेख किया गया कि परीक्षणोपरांत सत्यापनकर्ता एवं पुलिस अधीक्षक के अभिमत से सहमत होते हु शिकायत को बंद कर दिया है। यह सूचना शिकायतकर्ता सीताशरण पांडे को भी भेजी गई है। बता दें कि पांडे ने हाईकोर्ट में उक्त शिकायत-प्रकरण के संबंध में याचिका भी लगाई थी। जिसमें भी कोर्ट ने 3 सितंबर 2022 को दिए डायरेक्शन में उक्त मामले को डिस्पोज कर ईओडब्ल्यू स्तर से ही इसकी जांच को दिशा-निर्देश दे चुका है।

शिकायतकर्ता ने लगाए थे ये आरोप
आरटीआई कार्यकर्ता सीताशरण पांडे ने पूर्व नपाध्यक्ष माया नारोलिया के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत कर आरोप लगाए थे कि उन्होंने वर्ष 2009 से 2014 तक के अपने कार्यकाल में नैतिक पदीय जवाबदारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार से अनुपात से परे संपत्ति अर्जित की थी।

पांडे को हाईकोर्ट लगा चुका फटकार
बता दें कि पांडे को बिना तथ्यों के बार-बार याचिका लगाने पर पहले भी सख्त चेतावनी देते हुए फटकार लगा चुका है। ऐसा जिप्टी हट योजना में धांधली संबंधी याचिका को खारिज करते हुए फटकारा था। पांडे ने आरोप लगाया था एक महिला बी स्वर्ण कुमारी को पट्टा तो बांटा लेकिन वह जमीन बेचकर चली गई। जो नियम विरुद्ध है इसलिए दोषियों पर कार्रवाई हो। इसमें तत्कालीन नपाध्यक्ष माया नारोलिया, सीएमओ दीपक राय, सब इंजीनियर रमेश वर्मा को पक्षकार बनाया था। मामले में कोई दोषी नहीं पाया गया था।