
पूनम सोनी/होशंगाबाद। युवाओं का रुझान नौकरी से खेती की ओर हो रहा है। होशंगाबाद के अनिल अग्रवाल (४९) और नीलेश यादव (३५) को देखकर तो यही लगता है। दरअसल यह दोनों मिलकर अब जैविक कीटनाशक उत्पाद बना रहे हैं, जो किसानों के लिए उपयोगी साबित तो हो ही रहे हैं इसके अलावा यह आर्थिक रूप से संपन्न भी हो रहे हैं।
गौरतलब है कि किसान अपनी उपज को कीटों से बचाने के लिए हर साल रासायनिक दवाओं पर लाखों रुपए खर्च कर देते हैं। इससे जमीन को तो नुकसान होता ही है साथ में आर्थिक भार भी पड़ता है।
गांवों से खरीदते हैं गोबर और गोमूत्र
जैविक कीटरोधक उत्पाद बनाने के लिए हर सप्ताह ५० क्विंटल गोबर और ५० लीटर गोमूत्र खरीदा जाता है, जिससे ५० से १०० क्विंटल केंचुआ खाद और २०० लीटर प्राकृतिक कीटरोधक व वर्मीवाश पौध संजीवनी बनकर तैयार होती है। गोबर और गोमूत्र निमसाडिय़ा गांव से मंगवाया जाता है, जिसकी वजह से कई किसानों ने अपनी गायों को आवारा छोडऩे की बजाय घरों में बांधना शुरू कर दिया है।
जैविक अपघटक दे रहे नि:शुल्क
राष्ट्रीय जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद से जैविक कचरा अपघटक जैसी दवाओं को किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध करा रहे हैं, जिसमें ५ से १०० एमएल तक के लिक्विड बनाकर खेत में इसका छिड़काव किया जा सकता है। जैविक अपघटक (डिकम्पोजर) का उपयोग कर नरवाई को बिना जलाए खेत में दूसरे फसल को तैयार कर रहे हैं किसान इसका उपयोग लगभग १०० से अधिक किसान कर रहे है।
हर सप्ताह १०० क्विंटल खाद तैयार
जैविक कीटनाशक उत्पाद आंचलखेड़ा में बनकर तैयार किया जा रहा है। अनिल और नीलेश ने इसकी शुरुआत छ: माह पहले की थी, आज हर सप्ताह ५० से १०० क्विंटल जैविक खाद बनकर तैयार कर रहे हैं। जैविक खेती और जैविक प्रोडक्ट का प्रशिक्षण लेने के लिए यूएस, जंगलों की शिक्षा प्राप्त कर रही एकल अभियान की टीम, कॉलेज के विद्यार्थी यहां पहुंच रहे हैं। अनिल का कहना है इससे कई लोगों को रोजगार भी मिला है। यह उत्पाद की भोपाल, विदिशा, गुजरात तक डिमांड बढ़ी है।
यह उत्पाद बन रहे
जैविक कीटरोधक प्रोडक्ट में किसानों को केंचुआ खाद वी पॉवर, वर्मीवाश पौध संजीवनी, प्राकृतिक कीटरोधक व जैविक कचरा अपघटक जैसे प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं। जिसका उपयोग कर फसलों पर हो रहे कीटों के नुकसान से बचाया जा सकता है। यह हमारे शरीर के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है। जैविक कीटरोधक से मिट्टी गुणवत्ता व रोध प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
पुणे स्थित इंफोसिस कंपनी में थे कार्यरत
यह काम करने के लिए नीलेश यादव ने पुणे इंफोसिस कंपनी में आईटी इंजीनियर की नौकरी छोड़ी और यह काम कर रहे हैं। वहीं अनिल अपनी एक निजी दुकान चलाते हैं। यह लोग किसानों के लिए सीधे जैविक कीटरोधक उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं। छह माह पहले किए अपने इस व्यवसाय से यह अब तककरीब १ लाख रुपए की लागत लगाकर २.५० से ३ लाख रुपए का मुनाफा कमा चुके हैं।
Published on:
17 May 2018 05:18 pm
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