
नर्मदापुरम@राजेंद्र परिहार
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके हाथ में जो नोट हैं आखिर इसके कड़क कागज बनते कहां हैं। ये बनते हैं नर्मदापुरम में। नोटों में उपयोग होने वाला कागज बनाने का देश में इकलौता कारखाना नर्मदापुरम में है। शहर में स्थित प्रतिभूति कागज कारखाने (एसपीएम) से ही कागज नासिक और देवास जाता है। वहां नोट छापे जाते हैं।
यह कारखाना उच्च गुणवत्ता बैंक नोट और अन्य सिक्योरिटी पेपर मिल के लिए जरूरी कागजात बनाता है। यह भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) की एक इकाई हैै। एसपीएम में पीएम 5 मशीन से नोटों के कागज का उत्पादन हो रहा है। एसपीएम की स्थापना 1967 में हुई थी।
कारखाने का औपचारिक रूप से उद्घाटन 9 मार्च 1967 को तत्कालीन उपप्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने किया था। पहली दो मशीनों की स्थापना 27 जून 1967 को पूरी हुई। मशीन 3 एवं 4 की स्थापना 27 नवंबर 1967 को पूरी हुई।
1962 में शुरू हुआ था काम
स्वतंत्र भारत का सपना था कि मुद्रा कागज के आयात से देश से मुक्त हो। 60 के शुुरुआती दशक में ही परियोजना साकार हुई। कागज उद्योग के लिए जरूरी भूमि, जल, बिजली, परिवहन एवं मानव शक्ति की उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने नर्मदापुरम को बेहतर विकल्प माना। भवन की डिजाइन और निर्माण सीपीडब्ल्यूडी ने वर्ष 1962 में शुरू किया। 500 मीटर लंबे एवं 50 मीटर चौड़े मुख्य भवन का काम 28 अक्टूबर 1963 को शुरू हुआ।
नोटबंदी के दौरान दोगुना काम
कारखाने में नोटबंदी के समय दोगुना काम हुआ, इस कारण देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। एसपीएम में 500, 200, 100, 50, 10 के नोटों का कागज बनता है। पहले 2000 के नोटों का कागज भी तैयार हो रहा था, लेकिन अब संभवत: इसकी छपाई बंद होने के कारण इसकी मांग नहीं है। अब यह कागज नहीं बन रहा। यह कारखाना पहले केंद्रीय संस्थान था। 2006 में इसे निगम कर दिया गया है। इससे इसकी नीति में कई बदलाव आए हैं।
Published on:
13 Aug 2022 11:10 am
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