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फ्लॉप हो गई सरकार की झूलाघर योजना

न झूला मिला-न घर, ढूंढते रह गए अधिकारी, प्रदेश में स्वीकृत थे 2200 से एक्टिव मिले मात्र 215

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jhula ghar yojana latest news

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इटारसी। कामकाजी महिलाओं के लिए भारत सरकार ने बाल कल्याण बोर्ड के माध्यम से झूलाघर योजना चलाई थी। यह झूलाघर (शिशु गृह) अनुदान लेने के लालच में एनजीओ द्वारा कागजों पर चालू तो कर लिए, लेकिन धरातल पर इनका अस्तित्व नहीं के बराबर ही है।
बाल कल्याण बोर्ड माध्यम से चल रहे झूलाघरों की खोजबीन जब अधिकारियों की टीम ने किया तो झूलाघर नहीं मिले। जिले में १३५ स्वीकृत थे। पूरे जिले में एक भी झूलाघर नहीं मिला इसलिए इसके नवीनीकरण का प्रस्ताव नहीं भेजा। पूरे प्रदेश में २२०० झूलाघर चलाने का काम अलग-अलग एनजीओ को सौंपा गया था तलाश में मात्र २१५ झूलाघर ही एक्टिव मिले।

अब महिला बाल विकास के जिम्मे
झूलाघर संचालित कराने का जिम्मा प्रदेश बाल कल्याण बोर्ड का था लेकिन अब शासन ने इसे महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दिया है। महिला बाल विकास ने जब संचालित झूलाघरों के संबंध में जानकारी एकत्रित की। जिला परियोजना अधिकारी संजय त्रिपाठी ने बताया कि नया कोई भी रिन्युअल नहीं भेजा गया है। झूलाघर कागजों पर ही चल रहे थे। गौरतलब है कि झूलाघर के लिए शासन से १ लाख ५२ हजार रुपए का अनुदान मिलता है और एनजीओ १० प्रतिशत स्वयं खर्च करना होता हैं।
ये है उद्देश्य
कामकाजी माताओं के बच्चों के लिए डे केयर सुविधा प्रदान करने के साथ बच्चों के शारीरिक, हेल्थ, सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए और बेहतर चाइल्ड केअर के लिए माता-पिता को शिक्षित व सशक्तबनाना उद्देश्य है।
यह भी है जरूरी
- वर्कर १२ वीं पास और हेल्पर १० वीं पास हो, बच्चों के प्रति फ्रेंडली हो।
- ग्राउंड फ्लोर पर हो, बाल गृह में एक बच्चे के लिए कम से २०० स्क्वेयर फीट जगह हो जिससे वह आसानी से खेलकूद सके।
- सुरक्षित भवन, पीने का पानी हो, लाइट, चाइल्ड फ्रेंडली टॉयलेट, प्राथमिक उपचार के लिए किट हो, खेलकूद के सामान उपलब्ध हो।
- झूलाघर बच्चे के घर के पास ही हो या फिर जहां मां काम करती हो उससे आधा से १ किलोमीटर के अंदर हो। जिससे आकर मां अपने बच्चों को दूध पिला सके और आसानी से उन्हें ले सके और झूलाघर भेज सके। यदि अभिभावक समय से बच्चे लेने नहीं पहुंचे तो वर्कर अभिभावकों से जाकर मिल सके।

ये होना चाहिए...
- दो आयु ग्रुप बनाए गए हैं
- पहले आयु समूह में ६ माह से ३ वर्ष तक बच्चे
- दूसरे आयु समूह में ३ वर्ष से ६ वर्ष तक के बच्चे
- पहले आयु वर्ग में १० बच्चे रखे जा सकते हैं जबकि दूसरे आयु वर्ग में १५ बच्चे। एक यूनिट में कुल २५ बच्चे रखे जा सकते हैं।
- दो आयु समूह के लिए १-१ वर्कर और १-१ हेल्पर हो।
&जिले में झूलाघर का सत्यापन कराने के लिए सर्वे कराया गया था। एक भी झूलाघर पूरे जिले में एक्टिव नहीं था इसलिए नवीनीकरण के लिए कोई भी प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।
संजय त्रिपाठी, जिला परियोजना अधिकारी
&सत्यापन कराया गया तो झूलाघर कहीं भी चल ही नहीं रहे थे। इसलिए एक भी झूलाघर को रिन्युअल के लिए नहीं भेजा गया है।
शिवकुमार शर्मा, संयुक्त संचालक बाल विकास विभाग
प्रदेश में २१५ झूलाघर ही एक्टिव मिले
पूरे प्रदेश में करीब २२०० झूलाघर संचालित करने की स्वीकृति ली गई थी। इसमें से मात्र २१५ एक्टिव मिले हैं। इन्हें रिन्युअल के लिए भेजा गया है।
आरपी रमनवाल, अपर संचालक महिला एवं बाल विकास, भोपाल