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20 साल की उम्र में ठाना आज 70 की उम्र तक आधा दर्जन से अधिक देशों में कर चुके मंचन

फतेहकृष्ण को तालियां इतनी भा गई की बना ली रास महारास की अपनी मंडली

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होशंगाबाद. बीस साल की उम्र में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान लोगों की तालियों की गडग़ड़ाहट ने उनको इतना रोमांचित किया मंच से जुडऩे की ठान ली। इसके बाद बनी एक रासलीला लीला मंडली। करीब ५० से साल इस रासलीला का मंचन अनवरत रुप से जारी है। यह कहानी है मथुरा जिले के धमसिंगा गांव निवासी फतेहकृष्ण शर्मा की जिनकी रग-रग में रासलीला बसी है। ७१ से फतेहकृष्ण आज भी उसी उत्साह के साथ कार्यक्रम करते हैं।

साधना है रासलीला
फतेहकृष्ण शर्मा कहते हैं, रासलीला का मंचन साधना है। फतेहकृष्ण शर्मा के इशारे पर जब वृंदावन के कलाकार मंच पर गाते और थिरकते हैं, तो देखने वाले वाह-वाह कर उठते हैं। वे कहते हैं कि रासलीला में प्रस्तुति देने वाला हर कलाकार ईश्वर भक्ति को दर्शकों के सामने बखूबी प्रस्तुत करता है। ईश्वर की भक्ति सिर्फ भावना और भाव पर निर्भर करती है। इस रासलीला को देखने के लिए हर नवयुवकों आते है। व उनकी भक्ति को जागृत करता है।

इन देशों में मंचन
उनकी मंडली आधा दर्जन से ज्यादा देशों में रासलीला की प्रस्तुति दे चुकी है। फतेहकृष्ण शर्मा ने बताया कि उन्हेे १९८३ में भारत सरकार द्वारा देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नीदरलैंड, जर्मनी, बर्लिन, म्यूनिख, फ्रांस, पैरिस, आयरलैंड, बैल्जियम, हॉलैंड, हांगकांग व १९८६ पैरिस, रेन भोपालिए, बैल्जियम, रसिया वाडर, हांगकांग में मंचन कर चुके हैं।
ऐसे शुरु हुई मंडली : १९९४ में राष्ट्रपति पुरूस्कार से सम्मानित फतेहकृष्ण शर्मा के पिता बुद्धाराम शर्मा प्रसिद्व गायक थे। वर्ष १९५२ में वृंदावन में शिक्षा के साथ फतेहकृष्ण शर्मा ने कई बार रासलीला म कृष्ण ?्ण का अभिनय भी किया। बाद में स्वयं की मंडली शुरू कर दी। फतेहकृष्ण शर्मा के रग-रग में रासलीला बसी है।
इन लीलाओं की होगी प्रस्तुति
गोपाल भगत लीला, भक्तों के चरित्र लीला, वृज गोस्टर की लीलाएं, निकुंज लीला, अटियाम लीला, श्री चैयतन महाप्रभु लीलाएं इन पांच लीलाओं जो की १ महीने दिखाई जाती है।

इन पुरस्कारों से हुए सम्मानित
संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार उत्तरप्रदेश
कालीदास नाट्य अकादमी पुरस्कार मध्यप्रदेश
संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार नई दिल्ली
कामाख्या गार्डन में चल रही रासलीला
कामाख्या गार्डन में फतेहकृष्ण की मंडली नर्मदांचल संास्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित रास-महारास का मंचन कर रही है। जिसमें बेटे राधाकांत शर्मा उनका साथ दे रहे है। होशंगाबाद में वे १५ सालों से रास-महारास कर रहे हैं।