
घर में लगाएं यह पौधा, कभी नहीं खरीदना पड़ेगी चीनी
होशंगाबाद। महंगाई के दौरान यदि आपको शक्कर का कोई ऐसा विकल्प मिल जाए जिसके बाद अपको कभी शक्कर खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और न ही शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव पड़ेगा। तो खुशी से आपका चेहरा खिल उठेगा। जी हां...यह सही बात है यह सब कुछ संभव है स्टीविया (मीठी तुलसी) के पौधे से। स्टीविया के घर में 6 से 8 पौधे लगाकर आप शक्कर का खर्च बचा सकते हैं वो भी सालों साल तक के लिए।
पीडब्यूडी की नौकरी छोड़ी
अमित बमुरिया कभी पीडब्ल्यूडी में नौकरी करते थे तीन साल पहले उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती का काम शुरू किया था। इसके तहत उन्होंने एक साल पहले स्टीविया का उत्पादन शुरू किया। शुरुआत में इसे छोटे स्तर पर करने के बाद उन्होंने यह काम बड़े स्तर पर शुरू किया और आज वह 1 एकड़ में स्टीविया का उत्पादन कर रहे हैं। इससे करीब ढ़ाई लाख रुपए का मुनाफा लिया जाता है।
एक बार लगाने के बाद पांच साल तक मिलती है मिठास
स्टीविया की खेती करने वाले अमित बताते हैं कि स्टीविया का पौधा लगाने के बाद पांच साल तक इसकी पत्तियों और तनों से मिठास ली जाती है। इन पत्तियों को तीन से चार माह में तोड़ा जाता है। इन्हे सुखाकर एग्रीमेंट के अनुसार संबंधित को बेच दिया जाता है। इस प्रकार एक बार लागत लगाकर इसे पांच साल तक भुनाया जाता है।
यह हैं फायदे
इंसुलिन को संतुलित रखता है स्टीविया
स्टीविया एक छोटा पौधा होता है इसकी लंबाई 60-70 सेंटीमीटर होती है। इसे मीठी तुलसी भी कहते हैं। इसकी पत्तियों में मिठास होती है। इस पौधे में चीनी से 60-70 गुना अधिक मिठास होती है। यह इंसुलिन को संतुलित रखने का काम करता है।
- स्टीविया कैलोरी रहित होने के कारण मधुमेह रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।
- स्टीविया की पत्तियों से निकलने वाले स्टीवियोसाइड में चीनी से 250 गुना और गुल्कोज से 300 गुना ज्यादा मिठास मिलती है।
ऐसे होती है खेती
इसके लिए सबसे पहले पौध का रोपण किया जाता है। जिसे बारिश के पहले रोप दिया जाता है। समय-समय पर इसे खाद पानी उपलब्ध कराया जाता है। पहली बार में करीब 6 से 7 माह बाद इसकी पत्तियों से मिठास ली जा सकती है।
इसके पत्तों में पाए जाने वाले प्रमुख घटक स्टीवियोसाइड, रीबाडदिसाइड व अन्य योगिकों में इन्सुलिन को बैलेन्स करने के गुण पाए जाते हैं। जिसके कारण इसे मधुमेह के लिए उपयोगी माना गया है। यह एंटी वायरल व एंटी बैक्टीरियल भी है तथा दांतों तथा मसूड़ो की बीमारियों से भी मूकित दिलाता है। इसमे एन्टी एजिंग, एन्टी डैन्ड्रफ जैसे गुण पाये जाते है तथा यह नॉन फर्मेंटेबल होता है। 15 आवश्यक खनिजो (मिनरल्स) तथा विटामिन से युक्त यह पौधा अत्यंत उपयोगी औषधीय पौधा है।
प्रशिक्षण भी देते हैं अमित
अमित बामोरिया बताते हैं कि उन्होंने स्वयं का एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया है। वह बमोरिया मोती सम्बर्धन एवं एग्रो फार्म में जो मड़ई से 5 किलोमीटर पहले कामती रंगपुर , तहसील सोहागपुर, जिला होशंगाबाद मध्यप्रदेश।
चीनी के नुकसान
चीनी को सफेद जहर कहा जाता है चीनी में एसिड होता है चीनी को खाने से हमारे शरीर में होने वाली बीमारियां- डायबिटीज, कैंसर, हार्ट अटैक जैसी बीमारियां होती हैं जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक हैं चीनी को सफेद करने के लिए हडडियों से पॉलिस किया जाता है।
चीनी से कैंसर संभव
हर घर में 4-5 पौधा जरूर लगाए
स्टीविया के पौधे को न्यून क्लोरी मिठास का उत्तम प्राकृतिक स्त्रोत माना जाता है। जो शक्कर से लगभग 25 से 30 गुना अधिक मीठा, केलोरी रहित है व मधुमेह व उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए शक्कर के रूप में पुर्णतया सुरक्षित है।
Published on:
27 May 2018 09:00 am
बड़ी खबरें
View Allहोशंगाबाद
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
