20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नई रेत नीति : जिले का अब एक ठेकेदार होगा, जानें क्या होगी रेत खदान की कीमत

प्रदेश में सबसे ज्यादा रेत राजस्व देने वाला होगा होशंगाबाद जिला

3 min read
Google source verification
demo pic

demo pic

होशंगाबाद। खदानों के स्टॉकों के वैरीफिकेशन के बाद जिले में नए सिरे से रेत खदानों के ठेके होंगे। जिले का होगा एक ठेकेदार। इस बार रेत खदान 200 करोड़ में जाने की संभावना है। प्रदेश में होशंगाबाद जिला सबसे ज्यादा रेत राजस्व देनेे वाला जिला कहलाएगा। नई नीति के तहत ठेके समूह में दिए जाएंगे। जिले में जो 114 छोटी-बड़ी खदानों की सूची तैयार की गई है, उसके मुताबिक खदानों का ठेका 200 करोड़ से अधिक का होगा। समूहवार ठेके के लिए खनिज विभाग ने खदानों के रकबे, रेत की उपलब्ध मात्रा और खदान के मूल्य का आंकलन कर लिया है। ठेका खदानों में रेत के उत्खनन, भंडारण और परिवहन को लेकर कड़े प्रावधान किए हैं। इसमें रेत की चोरी को रोकने के लिए कवायदें की गई है।

दो दर्जन नई खदानें प्रस्तावित हुई
जिले में खनिज विभाग ने नए ठेकों की योजना बनाई है। उसमें सर्वे-आंकलन के बाद कुल 114 खदानों में से दो दर्जन नए प्रस्तावित खदान क्षेत्र है। ये नई खदान की श्रेणी में रखी गई है। इनमें तवा नदी की जासलपुर, निमसाडिय़ा की दो, होशंगाबाद तवा नदी की देवलाखेड़ी, बालाभेंट, चपलासर, झालसर सेठ, सांगाखेड़ाखुर्द, बाबई तवा नदी की सांगाखेड़ाकला, पीलीकरार, सोमलवाड़ा, जूडीयाघाट, कीरपुरा, पाहनवर्री, बनखेड़ी की दूधी नदी की मुर्गीढाना, कोमती, खापाखुर्द, जुन्हैटा, वहरावन, परसवाड़ा डूमर, इमलिया, उमरधा, पिपरिया राजा शामिल है। इनमें सबसे महंगी करीब 13 करोड़ मूल्य की इटारसी के पाहनवर्री की खदान भी शामिल है।

जिले में पूर्व से घोषित हैं 90 खदानें
नर्मदा, तवा सहित मछवासा, कोरनी, अजान, दूधी, गंजाल, मोरन नदी की कुल 114 खदानों में से 90 खदानें पूर्व से घोषित हैं। घोषित व प्रस्तावित कुल खदानों में सबसे अधिक 34 खदानें होशंगाबाद तहसील, दूसरे नंबर पर 28 बाबई तहसील मं, इसके बाद इटारसी में 10, पिपरिया-बनखेड़ी में 26, सिवनीमालवा में 13 एवं सोहागपुर में 3 खदानें शामिल हैं

नर्मदा में मशीनों से नहीं होगा खनन
जिले की नर्मदा 18 खदानों में नई नीति के तहत मशीनों से खनन, लोडिंग एवं भंडारण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अन्य नदियों में स्थित 5.00 हैक्टेयर तक की खदानों में से खनन, लोडिंग, व भंडारण स्थानीय मजदूरों से कराया जाएगा। अन्य नदियों में रेत खनन के लिए मशीनं के उपयोग की अनुज्ञा आवश्यकता तथा खनन योजना और पर्यावरणीय स्वीकृति में प्राप्त मंजूरी के आधार पर दी जा सकेगी।


रायल्टी भुगतान पर ही मिलेगी इन्हें रेत
नए प्रावधान के मुताबिक पंचायत-निकाय की शासकीय योजना, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि के लिए रेत खदान से रायल्टी का भुगतान करने के बाद ही मिलेगी। जमा की गई रायल्टी की संपूर्ण रकम, लोडिंग, व परिवहन को छोड़कर, की वापसी आवश्यक जांच व प्रमाणीकरण के आधार पर की जाएगी।

कलेक्टर स्तर पर जिले में ही बनेगा समूह
कलेक्टर स्तर से रेत खदानों का समूह बना है। समूह में सम्मिलित प्रत्येक खदान का क्षेत्रफल, सीमाएं, राजस्व नक्शा, खसरा पांचसाला, अक्षांश-देशांश के विवरण सहित प्रस्ताव खनिज संचालक के पास भेजे जाएंगे। संचालक ही अंतिम रूप देंगे। खदानों की नीलामी ई-टेंडर के माध्यम से होगी। समूह में ठेके तीन साल के दिए जाएंगे। खदान लेने वाले ठेकेदारों को खनन योजना, पर्यावरण स्वीकृति, जल एवं वायु सभी वैधानिक अनुमतियां लेनी होंगी।


अवैध खनन,परिवहन-भंडारण पर होगी सख्त कार्रवाई
कलेक्टर सहित प्राधिकृत अधिकारी अवैध खनन, परिवहन और भंडारण को रोकने वाहन, मशीन, औजार आदि की जब्त कर प्रकरण बनेगा। उत्खनित रेत की रायल्टी की 25 गुना के समतुल्य राशि जमा कराई जाएगी। इस अवधि यदि आवेदन, सहमति प्राप्त नहीं होती है तो कलेक्टर उत्खनित रेत की रायल्टी की 50 गुना शास्ति अधिरोपित करेगा। उक्त जुर्माना राशि जमा नहीं होने पर जब्त रेत, वाहन, मशीन को राजसात व नीलाम किया जाएगा।

इनका कहना है...
जिले में नई नीति के तहत इस बार समूह में ठेके ईं-टेंडर के जरिए नीलाम होंगे। जिले में कुल खदानों का मूल्य करीब 200 करोड़ है। अभी खदानों के स्टॉकों की वैरीफिकेशन चल रहा है। उपलब्ध रेत के निपटान के बाद नए ठेकों की प्रक्रिया शासन के निर्देश पर शुरू होगी।
-महेंद्र पटेल, जिला खनिज अधिकारी