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republic day 2018 पं. अश्विनी कुमार मिश्रा : पिता से विरासत में मिली थी देशभक्ति

शहर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. अश्विनी कुमार मिश्रा ने छात्र जीवन में ही दे दी थी आजादी के आंदोलन में दस्तक

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republic day 2018- Ashwini Kumar Mishra story in hoshangabad

republic day 2018- Ashwini Kumar Mishra story in hoshangabad

होशंगाबाद। जिस गणतंत्र का सपना देखा था आज वह फल फूल रहा है होशंगाबाद के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे पंडि़त अश्वनी कुमार मिश्रा को देशभक्ति अपने पिता शंभू प्रसाद मिश्रा से विरासत में मिली थी। इनके पिता शंभू प्रसाद मिश्रा ने आजादी के आंदोलन में शामिल होने के लिए अंगे्रजों की सिविल जज की नौकरी छोड़ दी थी। अश्विनी कुमार ने 16 वर्ष की उम्र में ही आजादी की लड़ाई में सहभागिता कर ली थी। आजादी के दीवाने अश्वनी कुमार ने अपने स्कूल में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करते हुए तिरंगा फहरा दिया दिया था।

ट्रेन को पलटाने की बनाई थी योजना
बताया जाता है कि तिरंग फहराने की घटना के बाद उनका स्कूल से निष्कासन कर दिया गया था, तो उन्होंने अपने दोस्तों के साथ एक ट्रेन को पलटाने की योजना बनाई थी, यह ट्रेन अंग्रेजों को लेकर मुंबई मेल जा रही थी।

प्रेम कुटी होती थी आजादी के दीवानों की सराय
अपने पिता पंडि़त शंभू दयाल मिश्रा को देख कर अश्विनी कुमार भी आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे। अश्वनी कुमार का जन्म 16 अगस्त 1923 को प्रेम कुटी में हुआ था उच्च शिक्षा बनारस हिंदू विवि से पं. मदनमोहन मालवीय के सानिध्य में प्राप्त की थी। वर्तमान में प्रेम कुटी सदर बाजार में है। समय के साथ हो रहे बदलाव के बीच अश्वनी कुमार के पुत्र अनुराग मिश्रा ने उनकी यादों को गर्व के साथ संजोए हैं। अश्विनी कुमार का निधन २ नबंवर २००७ को होशंगाबाद में हुआ।

प्रेमकुटी में ही रुकते थे पंडित नेहरु
आजादी की लड़ाई के दौरान जब भी पंडित जवाहरलाल नेहरू का होशंगाबाद आना होता वह प्रेम कुटी में ही रुकते थे। तब छोटे अश्वनी उनको देखकर काफी प्रभावित होते थे आजादी की लड़ाई की योजना अश्वनी कुमार के घर प्रेम कुटी में ही बनती थी।

पिता ने छोड़ी थी अंग्रेजों की नौकरी
अश्वनी कुमार मिश्रा के पिता शंभू दयाल मिश्रा अंगे्रजी शासनकाल में सागर में सिविल जज थे, उन्होंने गांधीजी के आह्वान पर नौकरी छोड़कर आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। इसके बाद विदेशी कपड़ों की होली जलाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 2 वर्षों के लिए जेल भेज दिया गया। शंभू दयाल मिश्रा सविनय अवज्ञा आंदोलन नमक सत्याग्रह से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। बाद में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मेंबर भी रहे, इसके साथ ही शंभू दयाल मिश्रा सेंट्रल असेंबली सीपी एंड बरार के लगभग 15 वर्षों तक (सांसद)सदस्य रहे। 1958 में उनका निधन हो गया।