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हनुमान जयंती पर आज साल का अंतिम व सबसे नजदीक दिखेगा सुपरमून

मून को दिया गया पिंकमून नाम

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हनुमान जयंती पर आज साल का अंतिम व सबसे नजदीक सुपरमून दिखेगा

हनुमान जयंती पर आज साल का अंतिम व सबसे नजदीक सुपरमून दिखेगा

होशंगाबाद। हनुमान जयंती की पूर्णिमा पर आज चंद्रमा का आखिरी सूपरमून होगा। जो सबसे नजदीक होगा। विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि इस मून को पिंकमून नाम दिया गया है। उन्होंने बताया कि आठ अप्रैल को अंतिम एवं सबसे निकटतम दूरी वाला सुपरमून दिखाई देगा। शाम को जब सूरज पश्चिम में अस्त होगा तब 7 बजकर 10 मिनिट पर पूर्व दिशा में आप इसे अन्य माइक्रोमून पूर्णिमा की तुलना में 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमक के साथ देख सकेंगे। वहीं लॉकडाउन के चलते प्रदूषण कम होने के कारण चांद की चमक अधिक रहेगी।

चंद्रमा जैसे जैसे ऊपर आए इसकी नजदीकी बढ़ेगी
सारिका ने बताया कि जैसे-जैसे चंद्रमा ऊपर की ओर आता जाएगा। इससे आपकी नजदीकी बढ़ती जाएगी। मध्यरात्रि के बाद यह फिर दूर होते हुए सुबह 6 बजकर 20 मिनिट पर अस्त हो जाएगा। यह पिंक कलर का नहीं होगा बल्कि अमेरिका में वहां इस मौसम में खिलने वाले एक जंगल फूल के रंग के आधार पर इसे पिंक मून का नाम दिया गया है। इसके अलावा अन्य कई देशों में इसे स्प्राउटिंग ग्रास मून, एग मून, फिश मून भी नाम दिया गया है।


क्या होता है सुपरमून
विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने सुपरमून कार्यक्रम में बताया कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकार पथ पर करता है। इसकी पृथ्वी से अधिकतम दूरी 406,692 किमी होती है जिसे अपोजी कहते हैं तथा न्यूनतम दूरी 356,500 किमी होती हैं। जिसे पेरिजी कहते हैं। जब 361,885 किमी से कम दूरी पर रहते हुए पूर्णिमा आती है। उसे सुपरमून कहा जाता है। इसमें चांद बड़ा और सूपरमून दिखता है।