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तिलक सिंदूर मंदिर का सर्वे कराएगा पुरातत्व विभाग, जानें क्यों

यहां भगवान शिव का बरसों पुराना मंदिर है

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तिलक सिंदूर मंदिर का सर्वे कराएगा पुरातत्व विभाग, जानें क्यों

इटारसी। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े होशंगाबाद संभाग के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तिलक सिंदूर शिव मंदिर पर अब पुरातत्व विभाग ध्यान देगा। अब तक पुरातत्व विभाग ने वन विभाग के अधिपत्य की जमीन के बीच स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर की सुध लेना जरुरी नहीं समझा था मगर लोगों की आस्था से जुड़ चुके इस स्थान को लेकर अब पुरातत्व विभाग ने चिंता शुरू कर दी है। पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर का सर्वे कराकर आगामी कार्ययोजना बनाने का मन बनाया है।
एक बार हुई थी चर्चा :

इटारसी रेंजर लखनलाल यादव ने बताया कि एक बार इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय की बैठक में चर्चा हुई थी मगर उसके बाद उस विषय पर आगे कोई बात नहीं बढ़ सकी। वन भूमि होने से नया कोई पक्का निर्माण करने के लिए अनुमति लेना पड़ती है। मंदिर को पूरा क्षेत्र पुरातत्व विभाग के पास है वहीं इसमें कुछ कर सकता है।

यह है महत्व

इटारसी से करीब 14 किमी दूर तिलक सिंदूर। यहां भगवान शिव का बरसों पुराना मंदिर है। यह इकलौता शिव मंदिर ऐसा है जहां पर सिंदूर लगाकर भगवान शिव को तिलक करने की परंपरा है। जिसे आदिवासियों ने शुरू की थी। आदिवासी शिवलिंग को बड़ा देव मानकर पूजते आ रहे हंै। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि जब भस्मासुर शिवजी पर अपना हाथ रखने आया था तो भगवान शिव भागते हुए इसी जगह पर आकर छिपे थे और यहां से सुरंग के रास्ते होते हुए पचमढ़ी पहुंचे थे। बताया जाता है कि वह सुरंग आज भी यहां मौजूद है।
- तिलक सिंदूर मंदिर वास्तव में बहुत प्रसिद्ध जगह है। वन क्षेत्र में होने से उसमें पक्का निर्माण कराने के लिए दिल्ली से अनुमति की आवश्यकता होती है। हम जल्द ही उस क्षेत्र का सर्वे कराएंगे और वहां विकास की संभावनाएं देखेंगे। जो भी उचित हो सकेगा, विभाग अवश्य करेगा।
सुनील पासदे, पुरातत्ववेत्ता होशंगाबाद