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ये कैसी किसान हितैषी सरकार, किसानों की जगह गार्ड आराम फरमा रहे

-मंडी विश्राम गृह पर तीन साल से खनिज विभाग का कब्जा,रूक नहीं पाते किसान,खनिज के जब्त वाहनों की निगरानी में तैनात हैं चार गार्ड, मंडी परिसर बना गैराज, लगे हुए हैं सड़क पर रेत के ढेर, प्रभारी मंत्री बोले-जल्द कराया जाएगा समस्या का निराकरण

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mandi narmdapuram

खनिज विभाग व्दारा जब्त किए गए रेत के अवैध वाहन यहां लंबे समय से पड़े होने से सड़कर कबाड़ में तब्दील हो रहे, मंडी के एक हिस्से को गैराज बना दिया गया है।

देवेंद्र अवधिया

नर्मदापुरम. ये कैसी किसान हितैषी सरकार है। किसानों को उनकी ही सुविधाएं नसीब नहीं हो पाती। जिला-संभागीय मुख्यालय नर्मदापुरम की आईटीआई रोड किनारे स्थित 25 एकड़ से अधिक में फैली कृषि उपज मंडी के कृषक विश्राम गृह में किसान नहीं ठहरते, बल्कि इस पर नवंबर 2019 यानी तीन साल से गनधारी पुलिस कर्मियों का कब्जा है। इन सुरक्षा गार्डों को खनिज विभाग के जब्त किए गए वाहनों की पहरेदारी के लिए तैनात किया हुआ है। लाइन के बजाए इन्हें कृषक विश्राम गृह को आवास के रूप में दे दिया गया है। बता दें कि जो भी रेत के अवैध वाहन जब्त किए जाते हैं, उन्हें खनिज विभाग मंडी परिसर में खड़े कराता है। मंडी स्थल के एक हिस्से को जब्त वाहनों की गैराज ही बना दिया गया है। किसानों को रूकने-ठहरने के लिए विश्राम गृह को खाली कराने के लिए मंडी समिति प्रबंधन कई बार जिला प्रशासन, खनिज एवं पुलिस विभाग को भी पत्र लिख चुका है, लेकिन तीन साल बाद भी कृषक भवन पुलिस से मुक्त नहीं हो पा रहा है। हालत ये है कि मंडी में दूरदराज के गांवों से जो भी किसान उपज लेकर आते हैं तो वे उपज तुलाई से लेकर विक्रय तक की अवधि में भी विश्राम गृह के टॉयलेट तो दूर इसमें भवन में प्रवेश ही नहीं कर पाते। मजबूरन इन्हें अपनी टै्रक्टर-ट्रॉलियों, शेडों या फिर आसपास की चाय-पान की होटलों में समय काटना पड़ता है। कमिश्नर-कलेक्टर और एसपी स्तर से भी समस्या का निराकरण नहीं हो पाया है। मप्र मंडी बोर्ड से लेकर जिला प्रभारी मंत्री तक भी ये मामला पहुंचा है।

17 साल पहले बना था विश्राम गृह, नहीं मिलती सुविधा
मंडी में किसानों के रूकने-ठहरने और आराम के लिए 17 साल पहले वर्ष 2005 में कृषक विश्राम भवन बना था। इसके शुभारंभ से लेकर 2019 तक इसमें रबी-खरीफ की खरीदी के दौरान किसान भवन का उपयोग करते थे। इस भवन में एक हॉल, एक कमरा सहित लेटबॉथ की सुविधा है, लेकिन 2019 के बाद से इसमें खनिज वाहनों की निगरानी करने वाले सशस्त्र गार्डों का आवास बन गया। इन्हें तत्कालीन एसडीएम व ओआईसी ने कृषक भवन में बारिश के कारण रूकवाया था, लेकिन तब से लेकर आज तक ये सुरक्षा गार्ड यहीं रह रहे हैं।

सड़क पर रेत के ढेर, नहीं निकल पाती टै्रक्टर-ट्रॉलियां
मंडी परिसर में प्रवेश गेट से लेकर तौलकांटे एवं शेडों तक पक्की सीमेंटेड सड़कें तो बनी है, लेकिन इस पर जब्त रेत के ढेर लगे हुए हैं। इस कारण उपज से भरी टै्रक्टर-ट्रॉलियां को बेचने के लिए आने वाले किसान वाहन समेत नहीं निकल पा रहे हैं। सड़क बाधित बनी हुई है। जब्त वाहन भी लंबे समय से बिना देखरेख के सड़कर कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।

इनका कहना है...
मंडी में किसानों के लिए विश्राम गृह की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में यहां जब्त खनिज वाहनों की पहरेदारी करने वाले चार सुरक्षा गार्ड निवासरत हैं। मंडी की तरफ से जिला प्रशासन व संबंधित विभाग को भी पत्र भेजकर खाली कराने के निवेदन किया जा चुका है।
-बीएल सोनिया, प्रभारी सचिव, कृषि उपज मंडी नर्मदापुरम।

यह बात मेरे संज्ञान में आई है। सुरक्षा कर्मचारियों को कहीं दूसरी जगह ठहरने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही कृषक भवन में किसानों को रुकने की सुविधा पुन: शुरू कराई जाएगी।
-नीरज कुमार सिंह, कलेक्टर नर्मदापुरम।

आपके माध्यम से यह बात पता चली है। अधिकारियों से जानकारी लेकर किसानों की जो भी दिक्कतें हैं, उसका निराकरण कराया जाएगा। किसानों को उनके भवन में विश्राम की सुविधा जल्द मुहैया करवाई जाएगी।
-बृजेंद्र प्रताप सिंह, जिला प्रभारी मंत्री व खनिज मंत्री मप्र