
why do tilak on forehead
सोहागपुर। हर सुबह हम तिलक लगाते हैं, कभी मंदिर में तो कभी किसी शुभ काम के लिए घर से निकलते समय। कभी सोचा है कि तिलक लगाने का कारण क्या है। हम यह क्यों लगाते हैं। कुछ ऐसे ही सवालों के जबाब गुरुवार को विप्रजनों ने सोहागपुर में दिए। नागदाह अग्रिहोत्री समाज के युवा संगठन द्वारा गुरुवार को विवेकानंद स्कूल में गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें युवाओं व समाज के वरिष्ठजनों द्वारा जिज्ञासा शांत करने के लिए आमंत्रित किए गए विप्रजनों से पूछे। कार्यक्रम दोपहर करीब दो बजे प्रारंभ हुआ और शाम पांच बजे तक चला।
सात्विकता का प्रतीक तिलक
मस्तक पर तिलक लगाने को शुभ और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। सफलता प्राप्ती के लिए रोली, हल्दी, चन्दन या फिर कुमकुम का तिलक लगाने की प्रथा है। किसी भी नए कार्य के लिए जा रहे हों तो काली हल्दी का टीका लगाकर जाएं। यह टीका आपकी सफलता में मददगार साबित होगा। वहीं मस्तिष्क के बीच में तिलक लगाने वाले भाग को आज्ञाचक्र कहा जाता है। इसके दाईं ओर अजिमा नाड़ी दूसरी ओर वर्णा नाड़ी है। ज्योतिष में आज्ञाचक्र बृहस्पति का केन्द्र है। इसे गुरु का प्रतीक-प्रतिनिधि माना गया है। बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं। साधना ग्रन्थों में इसे गुरुचक्र के नाम दिया है।
इनका भी बताया कारण
हम अपने पिता के चरण स्पर्श करते हैं जबकि ससुर दामाद और मामा अपने भांजे के चरण स्पर्श करते हैं। जबकि दोनों ही पिता तुल्य होते हैं। बाल किस दिन नहीं कटवाने चाहिए। विवाह में सात फेरे ही क्यों होते हैं। पंचक क्या होते हैं, ब्राम्हण को श्राद्ध में भोजन क्यों कराया जाता है आदि।
समाज के प्रदीप दुबे, लवकेश व्यास, भरत व्यास आदि ने बताया कि विप्र युवाओं में समाज कीे पूजन परंपरा को लेकर रुचि बढ़ाने तथा उनके मन में धर्म व धार्मिक प्रक्रियाओं तथा मान्यताओं के प्रति जिज्ञासा अथवा शंकाओं के समाधान के लिए उक्त कार्यक्रम आयोजित किया था। जिसमें पिपरिया से पं. सीताराम पांडे, रेवाबनखेड़ी से पं. द्वारकाप्रसाद जोशी, भानपुर से पं. कैलाश मंडलाई, राईखेड़ी से पंडित वीरेंद्र पुरोहित आदि उपस्थित थे।
पैर धुलाकर किया सम्मान
कार्यक्रम के पूर्व जो भी वरिष्ठ विप्रजन आयोजन में सम्मिलित होने पहुंचे उनके युवाओं ने पैर धुलाए तथा तिलक लगाकर आशीर्वाद ग्रहण किया तथा सम्मान किया। वरिष्ठजनों ने अभिभूत होते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की है कि विप्र समाज पर धर्म व राष्ट्र को उचित व अनुचित का ज्ञान देने की जिम्मेदारी है तथा युवा पीढ़ी अपने परिजनों को सम्मान करते हुए इस परंपरा के उचित निर्वाह के संकेत दे रही है।
Published on:
05 Oct 2017 11:04 pm
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