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पहले टीवी देखना शान था, लेकिन अब मोबाइल फोन तक सीमित

युवाओं को मोबाइल फोन पर और बुजुर्गों को बड़ी स्क्रीन पर टीवी देखना आ रहा है पसंद

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पहले टीवी देखना शान था, लेकिन अब मोबाइल फोन तक सीमित

पहले टीवी देखना शान था, लेकिन अब मोबाइल फोन तक सीमित

होशंगाबाद. कुछ सालों पहले की बात करें तो हर घर में टीवी नहीं हुआ करता है। केवल कुछ ही गीने-चुने घरों में टीवी होने के कारण देलहाने भरी रहती थी। और लोग बड़े रूचि के साथ एक साथ बैठकर देखा करते थे। लेकिन अब बदलते दौर में टेलीविजन का दौर मोबाइल तक सीमित रह गया है। समय के अनुसार आज लैपटॉप, स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर हर जगह उपयोग किए जाते हैं। जब बात बड़ी खबरें की हो तो ज्यादातर लोग बुद्धू बक्सा यानी टीवी की ओर ही आकर्षित होते हैं।

टेलीविजन के प्रभाव को आम जिंदगी में बढ़ता देख शुरू किया दिन
टेलीविजन के प्रभाव को आम जिंदगी में बढ़ता देख 1996 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 नवंबर का दिन विश्व टेलीविजन दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया। टेलीविजन आज हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। मनोरंजन का सबसे बेहतरीन साधन है यहीं कारण है कि आज भी ४५ वर्ष से ऊपर की उम्र के व्यक्ति शाम को ऑफिस या अन्य काम काज से फुरसत होने के बाद जब घर पहुंचते हैं तो वह सुकून से टीवी देखना पसंद करते हैं। वहीं इसके विपरीत युवा वर्ग मोबाइल पर ही टीवी देना पसंद करता है।

टीवी देखना भी बड़ी शान था
पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त अधिकारी केएल यादव बताते हैं कि १९८२ के आसपास एक समय था जब ब्लैक एडं व्हाइट टीवी परिवार व पड़ोसियों के साथ देखता था। आज स्मार्ट टीवी घरों की शोभा बढ़ा रही हैं। मैं तो आज भी घर में सुकून से टीवी देखना पसंद करता हूं।

समाजसेवी जितेंद्र सिरवैया बताते हैं टीवी के जरिए राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक सभी क्षेत्रों की जानकारी हर जगह मिल जाती है।

प्रखर उपाध्याय बताते हैं कि मोबाइल पर अनलिमिटेड कॉलिंग और प्रतिदिन दो से तीन जीवी इंटरनेट डाटा मिलने से मोबाइल यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब मोबाइल पर लाइव चैनल को भी लोग देख रहे हैं।