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video: 750 साल पुराने जगदीश मंदिर में जगन्नाथपुरी की झलक देखने को मिलती है, आखिर ऐसा क्या है यहां

50 सालों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम

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yaha hai 750 saal purana jagdish mandir, hota hai adbudh kaam

video: 750 साल पुराने जगदीश मंदिर में जगन्नाथपुरी की झलक देखने को मिलती है, आखिर ऐसा क्या है यहां

होशंगाबाद। मौसम में बदलाव का असर भगवान जगन्नाथ की सेहत पर भी पड़ा है। उन्हे लू लगने के साथ ही ज्वर के साथ पेट संबंधी परेशानी हुई हैं। उनका उपचार वैद्य द्वारा शुरू कर दिया है। भगवान जगन्नाथ जी की सेहत को अच्छा करने के लिए लिव 52 दवा के साथ ही स्वर्ण भस्म व सुदर्शन आदि काढ़ा भी दिया जा रहा हैं वैद्य ने गरिष्ठ भोजन की भी मनाही कर दी है। यह पंरपरा पिछले 50 सालों से चली आ रही है। पुजारी उरमलिया ने बताया कि होशंगाबाद में स्थित जगदीश मंदिर 750 साल पुराना है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाओं को जगन्नाथपुरी से महंत रामकिशोर दास महाराज द्वारा लाई गई थी। तब से नर्मदानगरी में जगन्नाथपुरी की झलक देखने को मिलती है।

4 जुलाई को निकलेगी यात्रा
मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां जेष्ठ शुक्ल माह की तिथि को ४ जुलाई को भगवान जगन्नाथ के स्वस्थ्य होने पर इनकी रथयात्रा निकाली जाएगी। जो पांच दिनों तक शहर में भ्रमण करेंगी। भगवान स्वस्थ्य होकर शहर की प्रजा का हाल जानने निकलेगें। रथयात्रा में हरिद्वार, बनारस, बद्रीनाथ सहित चारों धामो से बाबा शामिल होने आते है।

यह दी जा रही हैं दवाएं
वैद्य द्वारा भगवान जगन्नाथ के लिए एक पर्चा भी तैयार कि या गया है जिसमें स्वर्णमालिनी बसंत स्वर्ण मोती युक्त, लक्ष्मी विलास, सितोपलादि चूर्ण 30ग्राम, गिलोयास 10 ग्राम, तीस पुड़यिा शहद के साथ, महासुदर्शन काढ़ा, लिव 52 टेबलेट दो-दो सुबह व शाम को दी जा रही है।

यह भोजन दिया जा रहा
भगवान जगन्नाथ को पुराने चावल का भात, खिचड़ी, पुरानी जौ का दलिया, सत्तू, धान की लाई, ज्वार की लाई, मूंग की हरी दाल, पुराने तुअर की पतली दाल, दूध की बनी पतली खरी या लस्सी, जल उबालकर देना है। वहीं गरिष्ठ भोजन, ठंडा पदार्थ के सेवन पर सख्त रोक लगाई गई है। 15 दिन के बाद यह सभी दवाएं बंद कर अभिषेक कि या जाएगा। जिसके बाद भगवान पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे।