
Bawdi
गाडरवारा-सालीचौका। एकओर जहां आये दिनों जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। जगह जगह नागरिक, किसान जलसंकट से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में जहां सौ से दो सौ फुट नलकूप खनन पर बमुश्किल जलस्तर मिलता यदि उस क्षेत्र में यदि महज तीन फुट की खुदाई में भलभला कर पानी निकल पड़े तो निश्चित ही आश्चर्य होना लाजमी है।
ऐसी एक आश्चर्यजनक घटना समीपी ग्राम अमाड़ा में बीते दिवस घटी। जब एक कृषक कैलाश वर्मा ने अमाड़ा-इमलिया के बीच स्थित सिद्ध बाबा के पास जब जेसीबी से गड्ढा करना शुरु किया, तो महज तीन फुट की खुदाई पर जमीन से पानी निकलना शुरू हो गया, जहां देखते ही देखते जलभराव होने लगा।
सूख रहे हैं, टयूबवेल हैंडपंप
ज्ञात रहे कि गर्मी के चलते भूजल स्तर गिरने से क्षेत्र में अनेक हैंडंपप बंद हो गए हैं। बचे खुचे में या तो कम पानी आ रहा है, अथवा गंदा पानी दे रहे हैं। ऐसे ही टयूबवेल, बोरवेल में भी पानी का स्तर गिरने से फर्क पड़ा है।
याद आई मां की बात
जब इस संबंध में कृषक कैलाश वर्मा ने बताया कि उनकी स्वर्गीय माताजी कहा करती थीं कि सिद्ध बाबा के पास 20-25 वर्ष पहले एक झिरिया देखी थी, जो अब नहीं है। माताजी द्वारा बताई बात उस समय याद आ गई जब उनके भाई के खेत में जेसीबी मशीन गड्ढा खोदने गई थी। तब उन्होंने उत्सुकतावश चालक से सिद्ध बाबा के पास गड्ढा करने का आग्रह किया। वहां जैसे ही मशीन तीन फुट खनन कर पाई इस गड्डे में पहले तो गीली मिट्टी और कीचड़ फिर भलभला कर जल निकल आया। इससे यहां कोई झिरिया होने की पुिष्ट होती है कि वर्षों पहले यहां कोई झिरिया थी। बताया गया है यहां जल निकलने के बाद जहां वर्मा सनातन धर्मानुसार नर्मदा का जल लेने चले गए, वहीं सिद्ध बाबा में उक्त स्थान पर अनेक लोगों का सैलाब तीन फुट के गडढे में पानी देखने उमड़ा। बहरहाल क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इस मामले में विशेषज्ञों की मदद से यदि कोई भूमिगत जलस्त्रोत है तो उसे पुनरुद्धार कर संवारा जाए एवं जल को सहेज कर संरक्षित करने के प्रयास हों।
Published on:
30 Apr 2019 06:20 pm
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