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नरसिंहपुर. रक्तदान महादान यह बात केवल इंसानों पर ही लागू नहीं होती, जानवर भी यह महान काम करते हैं। यहां एक ऐसा ही वाकया सामने आया है जिसमें एक जर्मन शेफर्ड श्वान ने अपने मालिक के भांजे के बीमार श्वान को रक्त देकर उसका जीवन बचाने में मदद की है।
नरसिंहपुर निवासी दीपचंद जाटव का जर्मन शेफर्ड नस्ल का श्वान जिमी काफी समय से बीमार चल रहा था। कमजोरी की वजह से कई दिनों से उसे ड्रिप लगाई जा रही थी और जरूरी दवाएं दी जा रहीं थीं पर वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा था। उसके शरीर में रक्त का प्रतिशत ६ था जबकि स्वस्थ्य श्वान के शरीर में कम से कम १२ प्रतिशत रक्त होना चाहिए। उसकी यह स्थिति देख कर श्वान का इलाज कर रहे पशु चिकित्सक डॉ. संजय मांझी ने उसे खून चढ़ाने का निर्णय लिया। जिसके लिए उसी नस्ल के श्वान की तलाश की गई। संयोग से दीपचंद के कोसमखेड़ा निवासी मामा महेंद्र प्रताप के पास भी जर्मन शेफर्ड नस्ल का श्वान है जिसका नाम लियो है। जिसके बाद लियो को यहां लाया गया और पशु चिकित्सक डॉ. संजय मांझी ने अपने सहयोगी डॉक्टर रोशन चौधरी की मदद से पहले लियो का एक यूनिट रक्त निकाला और फिर उसे जिमी को चढ़ाया गया। रक्त चढ़ाने में करीब ४ घंटे लगे। रक्त चढ़ाने के बाद अब जिमी की हालत में सुधार है और वह पहले की तुलना में बेहतर है।
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12 प्रकार का होता है ब्लड ग्रुप
पशु चिकित्सक डॉ. संजय मांझी ने बताया कि कुत्तों का ब्लड ग्रुप १२ प्रकार का होता है। शुरू में तीन बार तक गु्रप मैच किए बिना और नस्ल मैच किए बिना रक्त चढ़ाया जा सकता है पर बेहतर होता है कि उसी नस्ल का रक्त चढ़ाया जाए।
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जिमी के मालिक दीपचंद जाटव ने बताया कि वे कुछ समय के लिए अपने घर से बाहर चले गए थे, जिमी की देखभाल करने वाला उनका बेटा भी एनसीसी कैंप में बाहर चला गया। जिसकी वजह से जिमी अकेला पड़ गया और उसकी तबीयत खराब हो गई।
Published on:
25 Jul 2019 09:15 pm
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