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नरसिंहपुर जिले में फुटबॉल का वजूद संकट में, स्तरीय मैदान नहीं, प्रतियोगिताएं बंद होने से खिलाडिय़ों का रुझान कम

जिले में फुटबाल का खेल अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। एक समय ऐसा था जब नगर में फुटबॉल की लगभग 10 सक्रिय टीमें हुआ करती थीं और स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले टूर्नामेंट खिलाडिय़ों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देते थे।

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जिले में फुटबाल का खेल अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। एक समय ऐसा था जब नगर में फुटबॉल की लगभग 10 सक्रिय टीमें हुआ करती थीं और स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले टूर्नामेंट खिलाडिय़ों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देते थे।

जिले की महिला फुटबाल टीम प्रतियोगिता में प्रदर्शन दौरान।

players to showcase their talent नरसिंहपुर. जिले में फुटबाल का खेल अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। एक समय ऐसा था जब नगर में फुटबॉल की लगभग 10 सक्रिय टीमें हुआ करती थीं और स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले टूर्नामेंट खिलाडिय़ों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देते थे। लेकिन आज बेहतर खेल मैदानों की कमी और फुटबॉल प्रतियोगिताओं का बंद होने से इस खेल के प्रति खिलाडिय़ों का रुझान कम हो रहा है।
नगर में फुटबॉल के लिए समर्पित मैदान नहीं होने से नई पीढ़ी का इस खेल से जुड़ाव लगातार कम हुआ है। विभिन्न क्लबों द्वारा आयोजित किए जाने वाले फुटबॉल टूर्नामेंट भी वर्षों से बंद पड़े हैं, जिससे खिलाडिय़ों को प्रतिस्पर्धी माहौल नहीं मिल पा रहा। इसका असर यह हो रहा है कि कभी जिले के लोकप्रिय खेलों में शामिल फुटबॉल अब सीमित दायरे में सिमटता जा रहा है।
कॉलेज की महिला टीम ही सक्रिय
पीजी कॉलेज मैदान में ही कुछ वर्षो से महिला फुटबॉल टीम सक्रिय दिख रही है। पहले खेल विभाग के समर कैंपों में फुटबॉल प्रशिक्षण के लिए बच्चे बड़ी संख्या में पहुंचते थे, लेकिन पिछले तीन वर्षों से जिला मुख्यालय पर चार और ब्लॉक स्तर पर दो खेलों के प्रशिक्षण शिविरों की व्यवस्था किए जाने के बाद फुटबॉल समर कैंप बंद हो गया। खेल विभाग द्वारा उन्हीं खेलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें कोच पदस्थ हैं और जिले में उनका प्रचलन अधिक है। फुटबॉल को पुनर्जीवित करने की दिशा में इस वर्ष आमगांव में एक नई पहल जरूर शुरू हुई है। जिले की कुछ महिला खिलाडिय़ों ने मणिनागेंद्र फाउंडेशन के सहयोग से फुटबॉल गतिविधियों की शुरुआत की है। इस प्रयास में क्रीड़ा अधिकारी अर्पित सक्सेना और स्टेट रेफरी दीपचंद नोरिया भी सहयोग कर रहे हैं। खेल प्रेमियों का मानना है कि यदि नियमित प्रशिक्षण, मैदान और प्रतियोगिताओं की व्यवस्था नहीं हुई तो जिले में फुटबॉल का भविष्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रेफरी बनकर बढ़ा रहे फुटबॉल की नई पहचान
नरसिंहपुर। शासकीय पीजी कॉलेज नरसिंहपुर के खिलाडिय़ों ने न केवल खेल के मैदान में फुटबॉल खेल में हुनर दिखाया है बल्कि बल्कि रेफरी के रूप में भी नई पहचान बनाई है। फुटबॉल रेफरी कोर्स में सफल होकर करुणा मिश्रा, वंदना यादव और दीपचंद्र कहार मध्य प्रदेश फुटबॉल संघ के अधिकृत रेफरी बने हैं और अब तक चार प्रतियोगिताओं में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इनकी उपलब्धियों से प्रेरित होकर अनीता वंशकार, नंदिनी ठाकुर, मुस्कान जाटव और मोहित पटेल ने भी रेफरी बनने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। चारों बीते अप्रेल माह में महू में आयोजित रेफरी कोर्स में भाग ले चुके है और प्रायोगिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्वविद्यालय स्तर तक जिले का प्रतिनिधित्व किया और अब खेल संचालन की जिम्मेदारी संभालने की ओर बढ़ रहे हैं।
खास-खास
कभी नगर में थीं करीब 10 फुटबॉल टीमें
मैदानों की कमी और टूर्नामेंट बंद होने से घटा खेल का दायरा
तीन वर्षों से फुटबॉल समर कैंप भी नहीं लग रहा
आमगांव में नई पहल से जगी है उम्मीद की किरण

वर्जन
खिलाड़ी के रूप में मैदान पर खेलना और रेफरी के रूप में खेल का संचालन करना दोनों अलग जिम्मेदारियां हैं। रेफरी कोर्स ने खेल को नए नजरिए से समझने का अवसर दिया। मेरी कोशिश रहेगी कि अधिक से अधिक युवतियां फुटबॉल और रेफरीशिप से जुड़ें।
करुणा मिश्रा, रेफरी, खिलाड़ी
फुटबॉल ने मुझे अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता सिखाई है। रेफरी बनने के बाद खेल के नियमों और तकनीकी पहलुओं की बेहतर समझ विकसित हुई है। यह उपलब्धि अन्य खिलाडिय़ों को भी नई दिशा दे सकती है।
वंदना यादव, रेफरी, खिलाड़ी
लंबे समय से खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने का अवसर मिला है। अब रेफरी के रूप में खेल से जुडकऱ नई जिम्मेदारी निभा रहा हूं। मेरा प्रयास रहेगा कि जिले में फुटबॉल को आगे बढ़ाने और नए खिलाडिय़ों को अवसर दिलाने में योगदान देता रहूं।
दीपचंद्र कहार, रेफरी, खिलाड़ी
वरिष्ठ खिलाडिय़ों की सफलता से प्रेरणा मिली और रेफरी बनने का निर्णय लिया। उम्मीद है कि प्रायोगिक परीक्षा में सफल होकर खेल के इस नए क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना सकूंगी।
अनीता वंशकार, खिलाड़ी
कॉलेज आने से पहले फुटबॉल से कोई जुड़ाव नहीं था, लेकिन नियमित अभ्यास और मार्गदर्शन से विश्वविद्यालय स्तर तक खेलने का अवसर मिला। अब रेफरी बनने की दिशा में आगे बढऩा मेरे लिए गर्व की बात है।
नंदिनी ठाकुर, खिलाड़ी
फुटबॉल ने मुझे नई पहचान दी है। रेफरी कोर्स में भाग लेने से खेल के प्रति समझ और बढ़ी है। भविष्य में रेफरी के रूप में भी बेहतर प्रदर्शन करने का लक्ष्य है।
मुस्कान जाटव, खिलाड़ी
बचपन से फुटबॉल से जुड़ा हूं। रेफरीशिप खेल में आगे बढऩे का एक नया अवसर है। उम्मीद है कि आने वाले समय में अधिक युवा खिलाड़ी जिले का नाम रोशन करेंगे।
मोहित पटेल, खिलाड़ी
फुटबॉल खिलाडिय़ों के लिए स्तरीय मैदान व प्रतियोगिताओं का निरंतर आयोजन जरूरी है। क्योंकि इससे न केवल युवाओं में खेल के प्रति रूझान बढ़ता है बल्कि उन्हें प्रतिभा प्रदर्शन का मौका भी मिलता है।
मनीष कटारे, खेल विशेषज्ञ नरसिंहपुर

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