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आज नर्मदा से मिलने आईं थीं गंगा

गंगा सप्तमी पर हवन-पूजन कर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, बरमान धाम के नर्मदा घाटों पर उमड़ी भीड़

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Ganga came to meet Narmada today

Ganga came to meet Narmada today

नरसिंहपुर/करेली। बैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी पर गंगा अवतरण दिवस के मौके पर गंगा सप्तमी भक्ति पूर्वक मनाई गई। इस मौके पर बरमान ग्राम के समस्त नर्मदा तटों पर श्रद्धालु नर्मदा के पुण्य दर्शन, स्नान पूजन करने पहुंचे। पुराणों में वर्णित मान्यता के अनुसार बैशाख मास की सप्तमी को गंगाजी को स्वर्ग से धरती पर लाया गया था। बताया गया है कि सप्तवसुओं को श्राप से मुक्ति दिलाये जाने के लिए भगवान श्रीराम के अग्रज राजा भागीरथ द्वारा स्तुति कर गंगाजी को पृथ्वी पर आने के लिए तप किया गया। जिससे प्रसन्न होकर गंगाजी पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं लेकिन स्वर्ग से पृथ्वी पर आने से गंगाजी का वेग इतना अधिक था कि पृथ्वी पर आते ही गंगाजी सीधे पाताल लोक पहुंच जाती। गंगाजी के इस वेग को समाप्त करने के लिए भगवान शंकर को गंगाजी को हिमालय पर्वत से धरती पर आने को कहा गया। हिमालय पर्वत पर भगवान शंकर ने गंगाजी को अपनी जटाओं में धारण करने के बाद पृथ्वी पर अवतरित किया और राजा भागीरथ को बताया गया कि जहां जहां से आप जायेंगे, वहां से गंगाजी आपके पीछे पीछे आएंगी। जिस दिन गंगाजी का अवतरण हुआ वह बैशाख मास की सप्तमी तिथि थी। इसी कारण से सनातन से अब तक बैशाख माह की सप्तमी को गंगा सप्तमी के रूप मनाया जाता है। एक और मान्यता है कि गंगासप्तमी को गंगा जी नर्मदा मैया से मिलने आती हैं। जिससे गंगासप्तमी पर नर्मदा स्नान का महत्व अधिक बढ़ जाता है। मान्यता अनुसार गंगा सप्तमी को भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने बरमान धाम के विभिन्न घाटों सूर्यकुण्ड, रेतघाट, सीढ़ी घाट, शगुन घाट, नवीन पुल के पास, पुराने पुल के पास आदि सभी स्थानों पर हजारों की संख्या में पुण्य स्नान किये और गंगा स्नान के समान पुण्य प्राप्त किया। बरमान, सतधारा, रामघाट, बिल्थारी घाट पर बड़ी संख्या मे स्थानीय और पड़ोसी जिलों से आए श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर स्नान दान और पूजन के पर्व का लाभ उठाया और भीषण गर्मी मे मां नर्मदा के शीतल जल मे गर्मी का प्राकृतिक रूप से शमन किया।