
समाधि स्थल पर 16 दिवसीय पूजा शुरू
नरसिंहपुर, (गोटेगांव). ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के समाधि स्थल पर मंगलवार से विशेष पूजा शुरू हुई जो 16 दिन चलेगी। मंगलवार को प्रात: काल शुरू हुई पूजा में ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद, ब्रह्मचारी ध्यानानंद, ब्रह्मचारी श्रीधरानंद ब्रह्ममविद्यानंद, ब्रह्मचारी अचलानंद, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयनंद, ब्रह्मचारी धारनंद, ब्रह्मचारी विमलानंद, ब्रह्मचारी इंदुभवानंद व श्रद्धालु मौजूद रहे। समृष्टि भंडारा 24 सितम्बर को होगा। वहीं प्रतिदिन दशाह पर्यन्त तक आत्मा, अन्तरात्मा, और परमात्मा का तर्पण, शंकराचार्य की समाधि स्थल पर पूजन, पायस बलि और ब्रह्म को अध्र्यदान होगा। ब्रह्म्रचारी सुबुद्धानंद ने पत्रकार वार्ता में बताया कि 21 सितम्बर को यति पार्वण, 22 सितम्बर को नारायण बलि और आराधना सम्पन्न होगी। 23 सितम्बर को श्रद्धाजंलि सभा के साथ 16 ब्राह्मण, 16 संन्यासियों का भंडारा होगा और इस सभा में दोनों पीठों के आचार्यों के पट्टाभिषेक की तिथि भी घोषित की जाएगी। ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद ने बताया कि शंकराचार्य की वसीयतें 23 सितम्बर की सभा में सभी को पढ़ कर सुृनाई जाएगी। सुबुद्धानंद ने बताया कि दोनों आचार्य अपने पीठ के शंकराचार्य के रूप में कार्य करने लगे हैं। शुभ मुहुर्त में उनका पट्टाभिषेक कार्यक्रम निर्धारित स्थलों पर होगा। पत्रकार वार्ता में मौजूद स्वामी सदानंद सरस्वती एवं अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जानकारी दी कि उन्होंने सुबुद्धानंद को अपना निज सचिव बनाया है । जिस प्रकार द्वयपीठ के शंकराचार्य के रूप में निज सचिव का दायित्व निभाते रहे हैं। उसी प्रकार हम दोनों के निज सचिव के रूप में कार्य करते रहेंगे।
भगवान चंद्रमोलेश्वर का स्थल बदला
आद्य शंकराचार्य के द्वारा सौंपा गया चंद्रमोलेश्वर शिवलिंग परम्परा के अनुसार नए शंकराचार्य को सौंपा जाता है। द्वारिका, शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को उस समय अभिषेक में जो सामग्री उनको प्रदान की गई थी वह सामग्री अब स्वामी सदानंद सरस्वती को सौंप दी गई है। भगवान चंद्रमोलेश्वर शिवलिंग अब मणिदीप आश्रम से सदानंद सरस्वती के आश्रम में पहुंच गए हैं।
शंकराचार्य की पार्थिव देह को कराए थे भगवती के अंतिम दर्शन
गोटेगांव. ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को भू समाधि प्रदान करने के पूर्व उनकी इष्टदेवी त्रिपुर सुंदरी भगवती राजराजेश्वरी देवी के अंतिम दर्शन कराने के लिए मंदिर परिसर में उनकी पालकी को अंदर ले जाया गया और मां भगवती की परिक्रमा कराई गई।
1982 में भव्य मंदिर का परमहंसी गंगा आश्रम में निर्माण कराने के बाद श्रृंगेरी के शंकराचार्य अभिनय तीर्थ महाराज की उपस्थिति में प्राण प्रतिष्ठा भगवती की गई थी। इसके दूसरे दिन दर्शन करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी झोंतेश्वर आई थीं। शंकराचार्य की इष्टदेवी भगवती राजराजेश्वरी मंदिर मार्ग के पास ही कुछ दूरी पर उनको भू-समाधि दी गई। मध्यप्रदेश पहला राज्य बन गया है जहां की भूमि पर दो पीठ के शंकराचार्य का अंतिम संस्कार किया गया है।
‘जिन्होंने जिम्मेदारी दी वही शक्ति प्रदान करेंगे’
गोटेगांव. ज्योतिष बद्रीकाश्रम एवं द्वारकाशारदापीठ के शंंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने पर भू-समाधि के पूर्व उनके उत्तराधिकारी की घोषणा के बाद ज्योतिष बद्रीकाश्रम पीठ के घोषित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अभी तक हम गुरु की सेवा को ही सुख मानते रहे हैं। जब से वह ब्रह्मलीन हुए हंै तब से आंखों के सामने अंधेरा ही अंधेरा दिखाई दे रहा है। गुरु का आदेश ही उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य है। जिन्होंने उनको बड़ी जिम्मेदारी दी है, वही उनको शक्ति प्रदान करेंगें और उनकी जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाने का प्रयास करेगें।
मुस्लिम संगठन ने कराया स्वल्पाहार
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की भू समाधि के दिन गोटेगांव सहित बगासपुर श्रीनगर एवं झोंतेश्वर का पूरा बाजार शोक में बंद रहा। अंतिम विदाई देने के लिए बाहर से आए हजारों अनुयायियों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो इसलिए श्रीनगर के मुसलमान संगठन एवं एकता समिति ने मिल कर सुबह से ही नि:शुल्क चाय पानी और नाश्ता की व्यवस्था करके अलग तरह का परोपकार सदस्यों ने कमाया। वहीं उमरिया चौराहे पर भी श्रीनगर के सदस्यों ने चाय और पानी की व्यवस्था करके आने-जाने वालों को राहत प्रदान की।
Published on:
13 Sept 2022 11:50 pm
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