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तीन साल पहले लगाया था नींबू का बगीचा अब कर रहा मालामाल

ग्राम पंचायत सिमरिया लौकी पार में शर्मा ने नदी किनारे अपने 4 एकड़ के खेत में लगभग ढाई एकड़ क्षेत्रफल में 3 साल पहले नींबू का बगीचा लगाया था ।

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नरसिंहपुर. इन दिनों नींबू के दाम आसमान पर हैं जिसकी वजह से नींबू चर्चा में है। नरसिंहपुर के एक किसान त्रिलोक शर्मा ने 3 साल पहले नींबू का बगीचा लगाया था तब उन्हें यह पता नहीं था कि कभी नींबू के दाम इस तरह आसमान छुएंगे। अब यह बगीचा उनके लिए काफी लाभदायक साबित हो रहा है । ग्राम पंचायत सिमरिया लौकी पार में शर्मा ने नदी किनारे अपने 4 एकड़ के खेत में लगभग ढाई एकड़ क्षेत्रफल में 3 साल पहले नींबू का बगीचा लगाया था । अब यह बगीचा इस सीजन में नींबू से भरा हुआ दिखता है । बगीचे में करीब 1000 नींबू के झाड़ लगे हुए हैं । शर्मा ने बताया कि बगीचे में दो तरह की किस्में हैं गलगलिया और कलकतिया यानी कोलकाता वाला नींबू। उन्होंने बताया कि दरअसल नींबू और नींबू की प्रजातियों में कुछ अंतर है। एक है लेमन जो जूस के लिए उपयोग होता है दूसरा है लाइम देशी कागजी नींबू जो अचार आदि में काम आता है उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर नींबू के एक बड़े झाड़ में एक सीजन में करीब 50 किलोग्राम तक की मात्रा में फल होते हैं । साल भर में नींबू की फसल दो से तीन बार तक ली जा सकती है । उन्होंने बताया कि इस बार नींबू के दाम बढऩे का बड़ा कारण यह है कि मार्च में जब नींबू के झाड़ में फूल आए उस समय बहुत तेज गर्मी पड़ी जिसकी वजह से अधिकांश फूल झड़ गए और काफी कम मात्रा में फल लगे । पिछले 2 सालों में कोरोना की वजह से नींबू की फसल बाजार में नहीं आ सकी थी । इसकी वजह से इस बार किसान इस फसल को लेकर उदासीन हो गए थे । इस साल की फसल बहुत अच्छी नहीं है लेकिन जो फसल है उसे नागपुर में अच्छे रेट मिल रहे हैं । शर्मा ने बताया कि नींबू का मुख्य बाजार नागपुर है । नरसिंहपुर में नींबू का बगीचा लगाने वाले किसान नहीं हैं । पिपरिया और मटकुली में नींबू की फसल ली जाती है। नींबू का उपयोग जूस और पावडर आदि बनाने में भी किया जाता है।
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