
Mosquitoes rage
नरसिंहपुर. गर्मी बढ़ते ही शहर में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। मच्छरों का बढ़ता प्रकोप अब केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि आम लोगों की जेब पर भी भारी पडऩे लगा है। मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के डर के बीच लोग अपने घरों, दुकानों और दफ्तरों में बचाव के तमाम उपाय अपना रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद राहत नहीं मिल रही। स्थिति यह है कि हर महीने मच्छरों से बचाव के लिए सैकड़ों रुपए तक खर्च करना लोगों की मजबूरी बन गया है।
शहरवासियों का कहना है कि मच्छरदानी, क्वाइल, लिक्विड मशीन, स्प्रे और क्रीम जैसे साधनों पर नियमित खर्च बढ़ता जा रहा है। एक औसत परिवार को हर महीने करीब 300 से 500 रुपए तक केवल मच्छर भगाने वाले उत्पादों पर खर्च करने पड़ रहे हैं।
मच्छरों की बढ़ती संख्या के पीछे शहर की गंदगी और लापरवाही भी बड़ी वजह बन रही है। खाली प्लॉट, चोक नालियां और गंदे नाले मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं। कई स्थानों पर पानी लंबे समय तक जमा रहता है, जिससे लार्वा तेजी से फैलता है। इसके बावजूद नियमित सफ ाई और दवाई छिडक़ाव का अभाव साफ नजर आता है।
वहीं नगरपालिका के पास मच्छरों के नियंत्रण के लिए पर्याप्त संसाधन क ी कमी भी आड़े आ रही है। जिसके कारण स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। जानकारी के अनुसार नपा के पास केवल 1 व्हीकल माउंट फ ॉगिंग मशीन ही उपलब्ध है,जिसके भरोसे पूरे शहर के 28 वार्ड हैं, ऐसे में फागिंग मशीन के रोज दौडऩे के बाद भी एक दिन में एक ही वार्ड में धुंए का स्प्रे हो पाता है। जिससे इस मशीन का प्रभावी उपयोग नहीं दिख रहा।
शहर क ी धनारे कॉलोनी, रेवानगर कॉलोनी, किसानी वार्ड, स्टेशन क्षेत्र के गयादत्त वार्ड जैसे क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं, जहां शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इस पूरे मामले में अधिकारियों का कहना है कि मच्छर और लार्वा नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और व्यवस्था में सुधार की दिशा में काम जारी है।
वर्जन
वर्तमान में नगरपालिका के पास एक ही फागिंग मशीन है, जिससे लगातार स्प्रे कराया जाता है। इसके अलावा एक और नई बड़ी फागिंग मशीन लाए जाने की कार्ययोजना बन रही है। छिडक़ाव करने के लिए पावडर भी बुलाया गया है।
इंजी. पुरूषोत्तम वाड़बुद्धे, स्वच्छता प्रभारी
Published on:
16 Apr 2026 01:40 pm
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