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केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापारी लामबंद, मंडी कर्मचारी भी हड़ताल पर

-मंडी कर्मचारियों का आरोपःमंडी का अस्तित्व खत्म करने की तैयारी-व्यापारी केंद्र सरकार द्वारा लागू "द फार्म्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स अध्यादेश" का विरोध कर रहे

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Merchants and Mandi Employees Indefinite Strike

Merchants and Mandi Employees Indefinite Strike

नरसिंहपुर. केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ एक साथ मंडी कर्मचारी और व्यापारी हड़ताल पर चले गए हैं। ये हड़ताल अनिश्चितकालीन है। मुद्दे दोनों के जु़दा-जु़दा हैं पर दोनों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए काम काज ठप कर दिया है। इस हड़ताल के चलते गुरुवार से ही मंडियों में सियापा पसरा है। बताया जा रहा है कि यह पहला मौका है जब मंडी कर्मचारी और व्यापारी एक साथ बेमियादी हड़ताल पर हैं।

जहां तक मंडी कर्मचारियों की बात है तो वे केंद्रीय मंडी अधिनियम के प्रावधानों को लेकर आंदोलित हैं। मंडी कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष रामसेवक गुमास्ता के अनुसार सरकार की नीतियों ने मंडी कर्मचारियों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अधिनियम के प्रावधान स्पष्ट नहीं किए जा रहे हैं। एक तरह से परोक्ष रूप से मंडी का अस्तित्व खत्म करने की तैयारी है। गुमास्ता के अनुसार मंडी कर्मचारियों की दो प्रमुख मांगें हैं। इनमें पहली मांग है, मंडी सेवा और बोर्ड सेवा का संविलियन कर इसे शासन अधिगृहित करे। इसके अलावा शासन ने मंडियों में टैक्स फ्री की जो व्यवस्था की है, उससे कर्मचारियों को एतराज नहीं है, लेकिन कर्मचारियों के वेतन-भत्तों समेत पेंशन सुविधा को सुनिश्चित किया जाए। ऐसा न होने तक मंडी कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहेगी, कामकाज बंद रहेगा।

भोपाल पहुंचे कई मंडी कर्मचारी
मंडी कर्मचारियों की 3 सितंबर से शुरू हुई प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल के पहले दिन जिले से बड़ी संख्या में मंडी कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि राजधानी पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन कर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। जिले के करीब डेढ़ कर्मचारी इस हड़ताल में सहभागी हैं।

उधर पंजीकृत व्यापारी केंद्र सरकार द्वारा लागू "द फार्म्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स अध्यादेश" का विरोध कर रहे हैं। उनके अनुसार प्रदेश की कृषि उपज मंडियों का कारोबार इस अध्यादेश के कारण प्रभावित होने लगा है। बेनामी व्यापार की बढ़ोत्तरी से पंजीकृत व्यापारियों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। मंडी के बाहर मंडी फीस, निराश्रित शुल्क, मंडी लाइसेंस आदि समाप्त कर दिया गया है, जबकि मंडी परिसर में अधिनियम लागू है। इससे व्यापार में असंतुलन पैदा हो गया है।

व्यापारियों की प्रमुख मांगें

-प्रदेश सरकार इस अध्यादेश पर अपना रुख स्पष्ट करे
-मंडी की फीस दर 50 पैसा, अनुज्ञा पत्र, निराश्रित शुल्क आदि समाप्त किए जाएं
-मंडी लाइसेंस फीस न्यूनतम रखकर इसकी अवधि आजीवन हो
-कृषकों को भुगतान व मंडी भुगतान सुनिश्चित हो
-मंडी परिसर में बने गोदाम उचित किराए पर दिए जाएं

व्यापारियों के अनुसार इस तरह की मांगों को लेकर वे 14 अगस्त को भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप चुके हैं। बावजूद इसके, मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे व्यापारियों में असंतोष है। व्यापारियों की ये हड़ताल 5 सितंबर तक चलेगी।